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गंगा पर बांध के खिलाफ उठी आवाज

Wed, 29 Apr 2015 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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वाराणसी। महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र जस्टिस गिरधर मालवीय ने मंगलवार को गंगा पर निर्मित और प्रस्तावित बांध परियोजनाओं को हटाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि गंगा को बांधा नहीं जाना चाहिए। सरकारों को सोचना चाहिए कि बिजली-पानी का विकल्प तो हमारे पास है लेकिन गंगा का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने धीरे-धीरे टिहरी बांध का भी विकल्प तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। अविरल गंगा समझौता शताब्दी वर्ष की रूपरेखा तैयार करने के लिए काशी में आयोजित गंगा महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने ये बातें कहीं। महासभा ने अविरलता-निर्मलता के लिए तटीय शहरों में गंगा कथाएं, धर्मसभाएं और राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन करने का फैसला किया।  
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रथयात्रा स्थित कन्हैयालाल गुप्त स्मृति भवन में बैठक की शुरुआत मां गंगा और महामना मदन मोहन मालवीय के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। गंगोत्री मंदिर के रावल हरीश सोमवाल के गंगा स्तोत्र के पाठ और व्यास मौर्य के गंगा भजन के बाद महासभा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा ने विषय प्रवर्तन किया। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि समझौता शताब्दी वर्ष के दौरान जिन पांच राज्यों से गंगा गुजरी हैं, वहां के तटीय शहरों में जागरूकता के कार्यक्रम किए जाएंगे। गंगा कथा के अलावा वैज्ञानिकों, कवियों के जरिए गंगा निर्मलीकरण से जनता को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इस जागरूकता अभियान को कामयाब बनाने के लिए महासभा के पूर्णकालिक कार्यकर्ता प्रशिक्षित किए जाएंगे। इस मौके पर रामानुजाचार्य हंसदेवाचार्य ने कहा कि जनदबाव के चलते केंद्र सरकार ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कर सिर्फ पांच बांध परियोजनाओं को रद किया। इससे काम नहीं चलने वाला है। सरकार बांधों का निर्माण रोके और समाज मिलकर गंगा में गंदगी गिरने से रोके। केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि गंगा की तर्ज पर ही देश की अन्य नदियों के अविरल-निर्मल प्रवाह के लिए आवाज उठने लगी है। निर्मलता की प्राप्ति के लिए हमें अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने की चेतना और ध्यान को केंद्रित करना होगा। गंगा का व्यवसायीकरण भी हो और अविरल-निर्मल धारा भी बच जाए, ऐसा संभव नहीं हो सकता। इस मौके पर आरएसएस के इंद्रेश कुमार, प्रो. यूके चौधरी, प्रो. डीके शर्मा, प्रो. देवेंद्र मोहन, डॉ. आदित्य, डॉ. गिरीश, डॉ. हेमंत गुप्ता, प्रो. पंकज राय, नवीन मिश्रा, विनय तिवारी समेत तमाम लोग उपस्थित थे। संचालन दृगबिंदु मणि सिंह ने किया। अध्यक्षता प्रेम स्वरूप पाठक ने की।

इनसेट
जस्टिस गिरधर शताब्दी समिति के अध्यक्ष बने
वाराणसी। जस्टिस गिरधर मालवीय को गंगा महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मंगलवार को अविरल गंगा समझौता शताब्दी समिति का अध्यक्ष निर्वाचित किया। गंगा नदी की अविरलता को लेकर महामना मदन मोहन मालवीय और अंग्रेजों के बीच हुए समझौते के सौ साल पूरे होने पर महासभा ने वर्ष 2016 को समझौता शताब्दी वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया। गंगा पर बैराज बनाने को लेकर पहली बार 1916 में समझौता हुआ था।
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