सीएम योगी ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को ताजा भोजन और स्वच्छ पेयजल के साथ दवाओं और आवागमन के लिए पर्याप्त नावों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बाढ़ पीड़ितों को हर संभव राहत और मदद उपलब्ध कराई जाए। पशुपालन विभाग के अधिकारियों से कहा कि पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त रखें। अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों को पर्याप्त राहत सामग्री दी जाए। ताजा भोजन और पेयजल की भी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जलस्तर अभी बढ़ सकता है। ऐसे में कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटान रोकने की भी तैयारी पूरी रहे। क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह ने बाढ़ पीड़ितों के लिए लंगर शुरू कराया है, जो सराहनीय है। उन्होंने प्रशासन को भी इस प्रकार की पहल में हरसंभव सहयोग को आगे रहने का निर्देश दिया।
खतरे के निशान के करीब पहुंच रही गंगा :
मिर्जापुर जिले में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच रही है। गुरुवार सुबह 77.400 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। जिले में खतरे का निशान 77. 724 मीटर निर्धारित है। इस समय जिले के 495 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इस समय एक सेमी प्रति घंटा की दर से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है।
एडीएम यूपी सिंह ने बताया कि इसमें सदर तहसील के 389 व चुनार तहसील के 106 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिले के छानबे, कोन, सिटी, मझवां, सीखड़ व नरायनपुर ब्लाक के गांव भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
बलिया में अब भी लाल निशान के ऊपर बह रही है गंगा :
बाढ़ का खतरा अब भी जारी है। गंगा के लाल निशान से ऊपर बहने से रामगढ़ क्षेत्र के हजारों लोग पलायन कर उंची जगहों पर चले गए हैं। हालांकि इन लोगों के लिए प्रशासन की ओर से न तो अब तक उचित शरणस्थली की सुविधा दी गई न ही खाने पीने के सामानों की व्यवस्था ही की गई है।
स्थानीय विधायक की तरफ से जरूर पहल की गई है। वहीं कुछ सामाजिक संगठन भी इस दिशा में आगे आए हैं। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का गुरुवार को जलस्तर 59,510 मी. दर्ज किया गया। साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। खतरा निशान 57.61 मीटर पर है। बलिया में लाल निशान से करीब दो मीटर ऊपर बह रही गंगा हाई फ्लड लेवल की ओर बढ़ रही है।
गाजीपुर :
गंगा नदी में लगातार बढ़़ाव के बाद गुरुवार की सुबह लहरों में ठहराव आया है। हालांकि अभी गंगा खतरे के निशान (63.10 मीटर) से करीब एक मीटर ऊपर बह रही हैं। सैकड़ों गांव तथा फसलें डूब गई हैं। इस खबर के बाद लोगों की चिंता अब थोड़ी कम हुई है। गुरुवार को दोपहर के समय में गंगा का जलस्तर 64.180 मीटर तक पहुंच गया है। गंगा के स्थिर होने के बाद से सिधाघर घाट में टोंस नदी, सैदपुर में गोमती, कठवा में घरों में पानी घुस गया है।
हालांकि इन लोगों के लिए प्रशासन की ओर से न तो अब तक उचित शरणस्थली की सुविधा दी गई न ही खाने पीने के सामानों की व्यवस्था ही की गई है। हालांकि स्थानीय विधायक की ओर से इस ओर जरूर पहल की गई है। वहीं कुछ सामाजिक संगठन भी इस दिशा में आगे आए हैं।
जौनपुर जिले में बढ़ने लगा गोमती नदी का जलस्तर :
गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के चलते गोमती का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे के भीतर गोमती नदी के जलस्तर में डेढ़ फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चंदवक के बरामनपुर और आसपास के तटवर्ती गांव में नदी का पानी घुस गया है। करीब 25 एकड़ से अधिक फसल डूब गई। तटवर्ती इलाके के लोग गोमती के बढ़ते जल स्तर से भयभीत है। गोमती नदी गाजीपुर में कैथी के पास गंगा नदी में मिलती है । गंगा का जलस्तर बढ़ाव पर होने के चलते गोमती में पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।
चंदौली जिले में बाढ़ केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का खतरे का निशान 71.40 मीटर है। गुरुवार दोपहर को गंगा का जलस्तर जलस्तर 71.34 मीटर तक पहुंच गया था।, यानी कि गंगा ने खतरे का निशान पार कर लिया है। वहीं अभी भी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है। पड़ाव संवाददाता के अनुसार गंगा का पानी गांव में सिवान से होते हुए घरों तक पहुंच गया है।
इससे लोग सुरक्षित आशियाने की तलाश में जुट गए हैं। क्षेत्र के बहादुरपुर, रतनपुर, मढिया, जलीलपुर, सूजाबाद, डोमरी, कूंडा आदि गांवों में घरों तक पानी पहुंच गया है। पड़ाव, धानापुर, चहनियां के करीब 6 गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिले में 42 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 150 नावें तैनात प्रशासन ने की हैं। कलेक्ट्रेट से भी निगरानी हो रही है।
किसी भी समय खतरा बिंदु पार जाएगी गंगा :
भदोही जिले में के जलस्तर में बढ़ाव जारी है। गुरुवार को दोपहर जलस्तर 79.860 पहुंच गया। दो सेमी प्रति घंटे की गति से बढ़ोतरी हो रही है। इसमें उतार चढ़ाव भी हो रहा है। माना जा रहा है कि किसी भी समय गंगा खतरे का निशान 80 मीटर को पार कर जाएगी। उधर कटान के कारण छेछुआ और भुर्रा गांवों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लहलहाती फसल समेत उपजाऊ भूमि गंगा में समाती जा रही है। सीमावर्ती गांवों में बाढ़ के कारण हालात विकट होते जा रहे हैं। कोनिया क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गावों में 500 बीघा फसल पानी में डूब गई है। दो दिनों में छेछुआ-भुर्रा में एक बिस्वा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है।
सीतामढ़ी में खतरा का कोई निशान नहीं है लेकिन 80 मीटर के ऊपर खतरा के निशान के ऊपर माना जाता है। हालांकि अब तक 79.85 मीटर तक जलस्तर पहुंचा है। 2013 में 81 मीटर से अधिक जलस्तर जाने से हाहाकार मच गया था।