सूतक काल में ‘बाबा’ को चढ़ा फलाहार :
काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल में मंदिर की व्यवस्थाएं यथावत रहीं। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के पट खुले रहे। भगवान भोलेनाथ को फलाहार चढ़ाया गया। सप्तऋषि आरती, भोग शृंगार आरती और शयन आरती अपने निर्धारित समय पर हुई। ग्रहण के सूतक के चलते बुधवार सुबह ढाई बजे से होने वाली मंगला आरती 4 बजकर 45 मिनट पर होगी।
रातभर स्नान, जप और अनुष्ठान :
खंडग्रास चंद्र ग्रहण के चलते दोपहर से ही घाटों पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। रात में सभी घाट श्रद्धालुओं से पट गए और उन्होंने गंगा स्नान किया। घाट पर जप और अनुष्ठान भी चलते रहे। ग्रहण समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया। इस दौरान हर हर महादेव के जयकारे से गंगा तट गूंजते रहे।