पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पहले कस्बों और बाजारों में ऐसी दुकानों की रेकी करते थे, जिनका रोजाना कारोबार अच्छा हो। इसके बाद दुकान के बाहर लगे बोर्ड से संचालक का नाम और मोबाइल नंबर नोट कर लेते थे। ठगी के लिए नया मोबाइल फोन और दूसरे व्यक्ति के नाम पर प्री-एक्टिवेट सिम खरीदा जाता था।
गिरोह का सदस्य दुकानदार को फोन कर बताता था कि आसपास एक मजदूर के पास काफी मात्रा में सोना है, लेकिन वह डर के कारण दुकान पर बेचने नहीं आ रहा। इसके बाद दूसरे सदस्य को स्थानीय व्यक्ति बनाकर दुकानदार से बात कराई जाती थी। गिरोह के सदस्य असली सोने का छोटा टुकड़ा दिखाकर उसकी जांच कराते और विश्वास हासिल करते थे। इसके बाद पैसे लेकर सुनसान स्थान पर नकली सोना देकर फरार हो जाते थे।
एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह प्रत्येक वारदात में सात से दस लाख रुपये तक की ठगी करता था। कई मामलों में पीड़ितों ने लोकलाज और संकोच के कारण शिकायत नहीं की। 23 सितंबर को भी गिरोह ने चुनार क्षेत्र की अजय भारती उर्फ सुमन को दो लाख रुपये लेकर तिगोड़वा अंडरपास के पास बुलाया था। इसी दौरान एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ पड़री थाने में धारा 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस की ओर से आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।