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उदीयमान चंद्र को अर्घ्य देकर पुत्र के दीर्घायु की कामना

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वाराणसी। पार्वती पुत्र गणेश के मंत्रों से काशी के गणपति मंदिर गूंज उठे। भादो की चतुर्थी तिथि पर सोमवार को शिव की नगरी प्रथमेश की आराधना में लीन रही। गणेश मंदिरों में सुख, समृद्धि और संतान सुख की कामना से भक्तों ने अनुष्ठान किए, वहीं महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजन किया।
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उदीयमान चंद्र के दर्शन व अर्घ्यदान के साथ ही गणेश पूजन किया गया। दुर्गा कुंड स्थित दुर्ग विनायक मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त से ही पूजन अर्चन का सिलसिला आरंभ हो गया। भगवान प्रथमेश के विग्रह को पंचामृत स्नान कराने के बाद उन्हें नूतन वस्त्र और आभूषण धारण कराए गए। इसके उपरांत गणेश विग्रह की आरती उतारी गई। इस अवसर पर भगवान गणेश के पंचोपचार, दशोपचार एवं षोडषोपचार पूजन का विधान भी पूर्ण किया गया। प्रथमेश को प्रिय दूर्वा और मोदक अर्पित किए गए।
एकदंत को प्रसन्न करने के लिए भक्तों ने श्रीगणेश स्तुति, संकटनाशन श्रीगणेश स्तोत्र, श्रीगणेश सहस्रनाम और श्रीगणेश चालीसा का पाठ किया। दुर्ग विनायक मंदिर के महंत पं. ज्ञानेश्वर दुबे ने सवा किलो कपूर से विराट आरती संपन्न कराई। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रती महिलाओं ने चंद्रोदय काल रात्रि 08:58 मिनट पर अर्घ्यदान किया। अपने भवनों की छतों से महिलाओं को बादल में छिपे चांद के दर्शन तो नहीं हुए किंतु उन्हें उदित मानकर महिलाओं ने अपने बाल की लटों पर जल गिरा कर चंद्रमा को अर्घ्य दिया। इसके अलावा लोहटिया स्थित बड़ा गणेश, सोनारपुरा स्थित चिंतामणि गणेश, दशाश्वमेध स्थित विनायक मंदिरों में भक्तों की कतार लगी रही।
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