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Friendship Day Special: बनारस में मिसाल बन रही इन लोगों की दोस्ती, खुशी हो या गम...हमेशा रहते साथ

Sun, 07 Aug 2022 10:07 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

 सोशल मीडिया पर रोज दोस्त बनते हैं, लेकिन सच्ची मित्रता निभाना आसान नहीं होता। आज फ्रेंडशिप डे है। ऐसे में कुछ लोगों से बात कर जानी मित्रता की अहमियत। कैसे दो लोग एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 
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बनारस में मिसाल बन रही इन लोगों की दोस्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो कई बार खून के रिश्तों से भी अधिक गहरा हो जाता है। तुलसीदास ने मित्रता की पहचान ‘आपदा काल’ में होने की बात कही है। आज सोशल मीडिया पर रोज दोस्त बनते हैं, लेकिन सच्ची मित्रता निभाना आसान नहीं होता। आज फ्रेंडशिप डे है। कुछ लोगों से बात कर जानी मित्रता की अहमियत। कैसे दो लोग एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 

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गर्दिश के दिनों में परवान चढ़ी दोस्ती
न्यू कॉलोनी ककरमत्ता निवासी ओम प्रकाश श्रीवास्तव व शिवाजी नगर कॉलोनी महमूरगंज निवासी पन्ना लाल मौर्या की दोस्ती नौकरी के दौरान हुई। पिछले साल 11 नवंबर को दोस्ती के 50 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया था। पन्ना ने बताया कि मकान बनवाते समय छुट्टी नहीं मिल रही थी। ऐसे में ओम ने खड़े होकर मकान बनवाया और आर्थिक मदद भी की। नौकरी के दौरान भी बहुत लेनदेन हुई, लेकिन कभी हिसाब नहीं रखा गया। घर में शादी होने पर भी एक दूसरे की मदद के लिए खड़े रहते थे।  
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मां पड़ी बीमार तो दोस्त ने की मदद
उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी राजीव द्विवेदी और इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव की मुलाकात 1992 में बीएचयू में स्नातक के दौरान हुई। इंटरैक्ट क्लब से जुड़ने पर दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी। दोनों ने साथ ही एनसीसी की एयर विंग ज्वाइन की। साथ ही सी सर्टिफिकेट प्राप्त किया। दोस्ती बढ़ी तो पारिवारिक जुड़ाव इस कदर हो गया कि सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। 2001 में राजीव की मां को लकवा मार गया था। उस समय राजीव पुणे में थे। ऐसे में राजेश ने इलाज, जांच से लेकर पूरी सेवा की। 

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कोरोना काल की भी फिक्र नहीं की
कंदवा निवासी सनी वर्मा व बीएलडब्ल्यू निवासी प्रशांत की दोस्ती ग्यारहवीं में हुई थी। 2021 में जब कोरोना अपने चरम पर था उस समय प्रशांत की तबीयत खराब हो गई। सनी ने एक सेकेंड के लिए भी जान की परवाह नहीं की। माता-पिता के मना करने के बावजूद दोस्त के घर मदद करने पहुंच गया।

कोरोना के कारण अस्पताल में चिकित्सक उसे देखने को तैयार नहीं थे। किसी तरह उसका इलाज शुरू हुआ तो पता चला कि प्रशांत को डेंगू है और उसकी स्थिति काफी गंभीर है। लगातार दवाइयों और सेवा की बदौलत सनी अपने दोस्त को मौत के मुंह से बाहर लेकर आए। इस बुरे वक्त में दोनों दोस्तों को दोस्ती के असली मायने समझ आए।
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