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यहां स्नान से मिलती है ब्रह्मदोष से मुक्ति

Fri, 24 Jun 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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कपाल मोचन कुंड
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 कपाल मोचन तीर्थ की महिमा अपार है। कभी भगवान ब्रह्मा का पांचवां सिर इसी स्थान पर गिरा था। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान से ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिलती ही है, इसके अलावा बांझपन से भी छुटकारा मिल जाता है। अब गंदगी के चलते यह कुंड बदहाल पड़ा है। हालांकि जनता की गुहार पर पखवारे भर पहले कुंड      की ड्रेजिंग कराने का काम शुरू हुआ लेकिन धनाभाव के चलते अब सुस्त पड़ गया है।
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दंत कथाओं के अनुसार ब्रह्मा का पांचवां सिर काटने के बाद काल भैरव उसे लेकर कई युग तक घूमते रह गए थे। ब्रह्मा का सिर काल भैरव के हाथ से नहीं छूट रहा था। जब उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की तब प्रेरणा मिली कि काशी में उत्तर दिशा में जाने के बाद इस समस्या से उन्हें मुक्ति मिलेगी। काल भैरव ने मुक्तिदायिनी काशी में उत्तरी दिशा से प्रवेश किया। इस दौरान ब्रह्मा का सिर उनके हाथ से छूटकर जहां गिरा, वहां एक धारा प्रस्फुटित हो गई। वही कुंड कपाल मोचन तीर्थ के नाम से विख्यात हो गया।


कपाल मोचन तीर्थ में लोग ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए स्नान करने आते हैं। इस कपाल भैरव तीर्थ (मंदिर) के पुजारी रह चुके दयाशंकर त्रिपाठी कहते हैं कि तीर्थ कुंड में स्नान से महिलाओं को बांझपन से भी मुक्ति मिलती है। चर्मरोग से भी निजात के लिए लोग इस कुंड के जल का इस्तेमाल करते रहे हैं। अब यह कुंड बदहाल पड़ा है। पक्की सीढ़ियों, घाटों के अलावा सुरक्षा दीवार वाले इस कुंड का जीर्णोद्धार 18वीं शताब्दी में रानी भवानी ने कराया था। फिलहाल कपाल मोचन एवं लाट भैरव कुंड समिति की ओर से इसकी सफाई कराई जा रही है। 10 दिन में अब तक 250 ट्राली से अधिक सिल्ट निकाली जा चुकी है लेकिन बारिश के बाद काम प्रभावित हो गया है। इसके अलावा धन न होने की वजह से भी काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है।
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