यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पछुआ बंद हुई है और वेंटिलेशन घटा है। इससे गर्मी रात में बाहर नहीं निकल पा रही है और रात का पारा तेजी से चढ़ा है। निचले क्षोभमंडल यानी कि 6 से 8 किमी ऊपर पूर्वी भारत के दक्षिणी झारखंड के आसपास एंटी साइक्लोन जैसी स्थिति बनी है।
यह स्थिति मौसम को साफ करती है। धूप तेज हो रही है, लेकिन गर्म हवा नीचे आ रही है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैली द्रोणी लो प्रेशर के प्रभाव से प्रदेश के निचले क्षोभमंडल में आ रही नम पुरवा हवाओं ने गर्मी बढ़ा दी है। पछुआ बंद हो चुकी है, जो कि गर्म हवा को हटाकर ठंडी हवाओं को लाती थी।
धुंध के पीछे वजह नमी का बढ़ना
डॉ. सिंह ने बताया कि धुंध के पीछे नमी भी मुख्य वजह है। आगामी 4–5 दिनों के दौरान प्रदेश में कोई सक्रिय मौसम तंत्र नहीं है। मौसम मुख्यतः सूखा बना रह सकता है। फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा और उसके प्रभाव से 15 मार्च से पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार बारिश की उम्मीद है। इससे तापमान में गिरावट भी आ सकती है।
बनारस की सबसे खराब हवा बीएचयू में
बनारस का एक्यूआई 104 अंक दर्ज किया गया। सबसे खराब हवा बीएचयू की रही, जहां एक्यूआई 143 अंक रहा। 124 अंक के साथ दूसरी सबसे प्रदूषित हवा अर्दली बाजार में, मलदहिया में 81 अंक और भेलूपुर में 68 अंक तक एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया।