साइबर विशेषज्ञ श्यामलाल ने बताया कि चारों ने ब्रांडेड कंपनियों की ओरिजिनल से मिलती जुलती फर्जी वेबसाइट बनाई थी। बल्क एसएमएस की मदद से एक साथ हजारों लोगों को पार्ट टाइम जाॅब, इनवेस्टमेंट में लाभ कमाने का लालच देते थे। जब कोई झांसे में आ जाता था तो छोटी-छोटी धनराशि उसके खातों में क्रेडिट कर बड़ा कमाने का लालच देते थे। इसके बाद पीड़ित को फर्जी वेबसाइट, टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा जाता था।
गिरोह के सदस्य बड़ी धनराशि का स्क्रीनशॉट भेजते थे। इससे लोग झांसे में आकर बड़ा निवेश कर देते थे। पीड़ितों से फर्जी कंपनी में पैसे डलवाते थे। वेबसाइट पर यूजर के अकाउंट में लाभ दो से तीन गुना दिखता था। बाद में जब लोग पैसा निकालना चाहते तो वह ऐसा नहीं कर पाता थे।
20 से 24 साल के आरोपियों ने बताया कि वर्चुअल मशीन के जरिये चीन, सिंगारपुर, थाईलैंड, कंबोडिया, दुबई से सारा फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। इससे उनकी पहचान छिपी रहती थी। जालसाजी से जुटाई रकम को वह फर्जी गेमिंग एप के हजारों यूजर के बैक खातों व गिरोह के सदस्यों के खातों में भेज देते थे। उसके बाद अलग-अलग माध्यमों से पैसे निकाल लेते थे। इस तरह वह ब्लैक मनी को व्हाइट में तब्दील कर देते थे।
आरोपियों ने बताया कि दुबई, कनाडा, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात में उनके गिरोह से जुड़े लोग पूरा प्लान तैयार करते हैं। वह टेलीग्राम के माध्यम से खाता प्रोवाइडर एजेंट व कॉर्पोरेट खाता चलाने वाले एजेंट व अकाउंट बेचने वाले खाताधारक को सर्च करते हैं। फिर उन्हें कमीशन का लालच देकर खाते की जानकारी मंगवा लेते हैं। उनके मोबाइल में पेक्स, ओटीपी फारवर्डर, वन डेटा, किंग क्वाइन, पुश बुलेट और टेलीग्राम एसएमएस को एपीआई से इंस्टाल करा दिया जाता है। यह एसएमएस व कांटेक्ट लिस्ट को रीड कर लेता है। इससे ओटीपी सीधे खाता चलाने वाले के पास चला जाता है। फिर खाताधारक पहले से जुड़े अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कर देता है। ये खाताधारक सिर्फ 2 से 8 प्रतिशत के कमीशन के लिए ऐसा करते हैं।