बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार
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मोक्ष की नगरी काशी में रीतियों को तोड़ते हुए बेटियों ने समाज के लिए नजीर पेश की है। दरअसल, यूनियन बैंक के डीजीएम सच्चिदानंद त्रिपाठी का गुरुवार को निधन हो गया। जिसके बाद पुत्रियों ने न सिर्फ पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि शव को मुखाग्नि भी दी। मूल रूप से बिहार के भभुआ निवासी सच्चिदानंद एक साल से गले में कैंसर से पीड़ित थे।
हुआ यूं, महमूरगंज स्थित आवास पर निधन होने के बाद जब अर्थी उठाने की बारी आई तो बेटियां आगे आईं। उन्होंने अर्थी को कंधा दिया और मणिकर्णिका घाट पर शव लेकर पहुंचीं। बड़ी बेटी सरोजनी ने पिता को मुखाग्नि दी।
परिवार में पत्नी सत्या त्रिपाठी तथा चार पुत्रियों में सरोजनी, अन्नपूर्णा, अर्चना और सुधा हैं। बेटियों ने बताया कि पिता सामाजिक कार्यों और दूसरों की सहायता में हमेशा तत्पर रहते थे। हमारी परवरिश उन्होंने बेटों की तरह ही की थी।
परिजनों ने बताया कि कैंसर की जानकारी होने के बाद सच्चिदानंद त्रिपाठी का इलाज निजी अस्पताल में कराया जाना था। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए परिवार वालों को बताया था और 14 जनवरी 2019 को मुंबई के टाटा मेमोरियल हास्पिटल में गले का ऑपरेशन हुआ था। वे कुछ समय तो ठीक रहे, मगर दो माह से परेशानी फिर बढ़ने लगी थी। वे वाराणसी विकास समिति के सदस्य और शव वाहिनी के संचालक भी थे।