फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: हत्या के केस में 22 वर्ष बाद सपा सांसद प्रतिनिधि व अधिवक्ता समेत चार भाई दोषी, 26 को सुनवाई; जानें मामला

Fri, 21 Aug 2026 10:42 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर।

सार

जौनपुर में हत्या के 22 वर्ष पुराने मामले में सपा सांसद प्रतिनिधि व अधिवक्ता समेत चार भाइयों को अदालत ने दोषी करार दिया। मामला वर्ष 2004 का है, जब जमीनी विवाद में मियांपुर तिराहे के पास आशीष मौर्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अदालत में 26 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।
विज्ञापन
26 अगस्त को सुनवाई। - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मियांपुर में जमीनी विवाद में गोली मारकर आशीष कुमार मौर्य की हत्या के मामले में 22 वर्ष बाद फैसला आने वाला है। मामले में मनोज कुमार मौर्य उनके भाई अधिवक्ता अश्वनी कुमार मौर्य, आशीष मौर्य और पवन कुमार मौर्य को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अनिल कुमार यादव की अदालत ने हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं में दोषी करार दिया है। 

विज्ञापन


अदालत ने चारों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। सजा के बिंदु पर 26 अगस्त को सुनवाई होगी। मनोज कुमार मौर्य जौनपुर से सपा सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि हैं।

घटना 16 अगस्त 2004 की सुबह करीब 8:30 बजे की है। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मियांपुर तिराहे पर डॉक्टर शिव सूरत द्विवेदी के मकान के सामने विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

अभियोजन के अनुसार रामसेवक मौर्य, उनके चार पुत्र अश्वनी कुमार मौर्य, आशीष मौर्य, मनोज कुमार मौर्य और पवन कुमार मौर्य तथा पड़ोसी राजेश उर्फ छोटू विवादित जमीन पर बांस-बल्ली गाड़ रहे थे। विरोध करने पर फायरिंग की गई, जिसमें आशीष कुमार मौर्य की गोली लगने से मौत हो गई थी। मामले में पवन कुमार मौर्य पुत्र जियालाल निवासी मियांपुर ने लाइन बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 

अभियोजन के अनुसार वादी और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर मुकदमा पहले से ही चल रहा था और उस समय 16 अगस्त को आयुक्त को मौके का मुआयना करना था। घटना में वादी समेत छेदीलाल, जियालाल, वीरेंद्र, शशिबाला, रमाशंकर और प्रेमचंद मौर्य  को भी चोटें आई थीं।पुलिस ने घटना के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पवन की निशानदेही पर रामसेवक के घर से लाइसेंसी बंदूक बरामद हुई। 

विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन को दोषी करार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामसेवक मौर्य की मृत्यु हो गई, जबकि राजेश उर्फ छोटू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें