अभियोजन के अनुसार रामसेवक मौर्य, उनके चार पुत्र अश्वनी कुमार मौर्य, आशीष मौर्य, मनोज कुमार मौर्य और पवन कुमार मौर्य तथा पड़ोसी राजेश उर्फ छोटू विवादित जमीन पर बांस-बल्ली गाड़ रहे थे। विरोध करने पर फायरिंग की गई, जिसमें आशीष कुमार मौर्य की गोली लगने से मौत हो गई थी। मामले में पवन कुमार मौर्य पुत्र जियालाल निवासी मियांपुर ने लाइन बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अभियोजन के अनुसार वादी और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर मुकदमा पहले से ही चल रहा था और उस समय 16 अगस्त को आयुक्त को मौके का मुआयना करना था। घटना में वादी समेत छेदीलाल, जियालाल, वीरेंद्र, शशिबाला, रमाशंकर और प्रेमचंद मौर्य को भी चोटें आई थीं।पुलिस ने घटना के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पवन की निशानदेही पर रामसेवक के घर से लाइसेंसी बंदूक बरामद हुई।
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन को दोषी करार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामसेवक मौर्य की मृत्यु हो गई, जबकि राजेश उर्फ छोटू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।