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स्थापना दिवस: शास्त्री की डिग्री से शुरू हुआ विद्यापीठ का सफर, पूर्व PM-CM कर चुके पढ़ाई; जानें 1921 का इतिहास

Mon, 10 Feb 2025 11:34 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ आज अपनी स्थापना दिवस मना रहा है। इसका इतिहास काफी दिलचस्प है। काॅलेज कैंपस में रैली निकालकर विश्वविद्यालय की गाथा को याद किया गया। 
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ 10 फरवरी को 104 साल का हो गया। स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य केंद्र रहे इस विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1921 में वसंत पंचमी पर हुई थी। शुरुआत में इस विश्वविद्यालय की पहचान शास्त्री की डिग्री से ही थी। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री और यूपी के पूर्व सीएम पं.कमलापति त्रिपाठी शास्त्री यहीं से पढ़े थे।

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लिहाजा भारतीय राजनीति, इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन की पढ़ाई शुरुआत में हुई। अब यहां 80 कोर्स की पढ़ाई होती है। समय बढ़ने के साथ-साथ पाठ्यक्रमों का विस्तार हुआ और अब स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स के साथ ही चिकित्सा शिक्षा तक का सफर पहुंच गया है।
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यहां पांच जिलों के करीब 228 कालेजों में दो लाख से अधिक विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वसंत पंचमी के दिन 10 फरवरी 1921 को काशी विद्यापीठ की स्थापना असहयोग आंदोलन के समय शिवप्रसाद गुप्त ने भदैनी में की। 

महात्मा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी। शुरुआत में मुख्य परिसर में ही पढ़ाई हुई लेकिन शिक्षा के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से परिसर का विस्तार कर एनटीपीसी, भैरवतालाब, गंगापुर में कर दिया गया। वाराणसी के साथ ही आसपास के जिलों में कॉलेजों को भी संबद्धता मिली। 

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1996 में चिकित्सा विज्ञान संकाय का आया नाम
प्रो. सतीश राय का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 1990 व 2000 के दशक में और ज्यादा संकाय एवं विभाग खुले। 1986 में शिक्षा, वाणिज्य एवं प्रबंध शास्त्र, ललित कला, पत्रकारिता, शारीरिक शिक्षा आदि सहित आठ नये विभागों की स्थापना प्रो. दूधनाथ चतुर्वेदी के कुलपति काल में हुई। 

छात्रों ने नाम के आगे लिखना शुरू कर दिया शास्त्री
काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सतीश राय का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा के रचनात्मक आंदोलन के तहत स्थापित यह संस्था भारतीय स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आंदोलन की नर्सरी और भारतीय समाजवाद एवं समाजवादी आंदोलन की कार्यशाला रही है। 

विश्वविद्यालय में शुरुआती शिक्षा शास्त्री की उपाधि के साथ दी जाती थी। इस वजह से यहां से पढ़े छात्रों ने शुरुआत में डिग्री हासिल करने के बाद अपने नाम के आगे शास्त्री लिखना शुरू कर दिया। इसमें पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री, पं.कमलापति त्रिपाठी शास्त्री, प्रो. राजाराम शास्त्री, भोला पासवान शास्त्री, अलगू राय शास्त्री का नाम शामिल है। 
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