फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व पीएम नेहरू ने मऊ को बताया था यूपी का मैनचेस्टर, अब लॉकडाउन में कहीं गुम हो गई लूम की आवाज

Thu, 30 Apr 2020 11:49 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
लॉकडाउन की वजह से बंद पड़ा मऊ में साड़ी उद्योग। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

हम बुनकर हैं हुजूर, यादों की चादर बुनते हैं, समय के धागों से, लेकिन आज समय ऐसा हो गया कि कोरोना हमें बुनने ही नहीं दे रहा है और हमारे सपनों पर पानी फेर दिया। साड़ी तैयार न होने से बुनकर अपना दर्द बयां करते हुए रो देते हैं। कुछ ऐसा ही दर्द मऊ के सभी बुनकरों का है।

विज्ञापन


'एक जिला-एक उत्पाद' में चयनित होने के बाद भी जिले के बुनकरों को, लॉकडाउन में इस योजना का लाभ नहीं मिला। ऐसे में जिले के बुनकरों का जीवन ऐसा घरों में सिमटा कि वो भुखमरी के शिकार हो चले हैं। पूर्वांचल के जिलों में मऊ साड़ी उद्योग के लिए जाना जाता है, यूं कहना गलत नहीं होगा कि मऊ साड़ी का हब है। इसके चलते आम दिनों में मऊ के बुनकर समृद्धशाली होते है।

इसीलिए इस उद्योग के चलते मऊ को पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने यूपी का मैनचेस्टर की संज्ञा दिया था। आम दिनों में शहर के हर घर से सुनाई पड़ने वाली लूम की खटर-पटर की आवाज लॉकडाउन में गुम हो गई है। लॉकडाउन की अवधि बढ़ने से आज बुनकरों की हालत बद से बदतर हो चली है।  जो जिंदगी लूम के खटर-पटर से शुरू होती थी, आज इस रफ्तार पर कातिल कोरोना ने लगाम लगा दी है।

विज्ञापन

इन्हीं हकीकत को जानने के लिए जब हम बुनकर बाहुल्य क्षेत्र खीरीबाग पहुंचे तो वहां मजदूर अफजाल ने बताया कि एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने के बाद भी मऊ का साड़ी उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। कोरोना माहामारी के बीच न काम है, न ही पूरे हुए काम के पैसे मिल रहे हैं। इन्हीं सब के बीच सरकार से कोई उम्मीद थी कि वो बुनकरों की कुछ मदद करेगी मगर वो भी नहीं हुआ।

वहीं पहाड़पुरा निवासी शकील ने कहा कि रमजान में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। पैसे नहीं हैं और इस महीने में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है। आज बुनकर पूरी तरह से भूखमरी के कगार पर हैं। वहीं रुखसाना ने बताया कि आने वाले समय मे बच्ची की शादी है। बाजार पूरी तरस से बैठा हुआ है। काम नहीं है और जो बकाया पैसा है उसकी भी मिलने की अभी उम्मीद कम है।
विज्ञापन

यही हाल मऊ के सभी बुनकरों का है। ऐसे में साड़ी के इस कारोबार को अभी उठने में काफी महीनों लग जायेंगे। कोरोना की बीमारी से तो नहीं मगर इसके असर से मऊ का साड़ी व्यापार जरूर पूरी तरस से बीमार होकर वेंटिलेटर पर चला गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें