इस मामले में ठेकेदार सरफराज अंसारी ने सैदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आरोपियों ने निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाई, कर्मचारियों को धमकाया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। घटना उस समय काफी चर्चा में रही थी और लंबे समय तक इसकी न्यायिक प्रक्रिया चलती रही।
सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का परीक्षण करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूतन द्विवेदी ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। इसी आधार पर अदालत ने बृजेश सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
करीब तीन दशक से अधिक समय तक न्यायालय में लंबित रहे इस मामले में आए फैसले के बाद इसकी न्यायिक प्रक्रिया समाप्त हो गई। यह प्रकरण अपने समय के चर्चित मामलों में शामिल रहा था और बुधवार को अदालत के निर्णय के साथ इसका औपचारिक पटाक्षेप हो गया।