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UP: पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को सीजेएम कोर्ट ने किया बरी, जानें क्या हुआ था 1990 में; दलीलों को सुना गया

Wed, 15 Jul 2026 04:44 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Ghazipur News: गाजीपुर के 1990 के चर्चित देवकली पंप कैनाल मारपीट व फायरिंग मामले में सीजेएम कोर्ट ने पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं कर सका।
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फैसले के बाद कोर्ट से बाहर आते बृजेश सिंह। - फोटो : संवाद
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UP Crime News: गाजीपुर के चर्चित देवकली पंप कैनाल मारपीट और फायरिंग प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नूतन द्विवेदी की अदालत ने पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। बुधवार को आए इस फैसले के साथ करीब 36 वर्ष पुराने मामले का पटाक्षेप हो गया।

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यह मामला 3 दिसंबर 1990 का है, जब गाजीपुर के सैदपुर थाना क्षेत्र स्थित देवकली पंप कैनाल पर नहर निर्माण कार्य चल रहा था। आरोप था कि बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, विजयशंकर सिंह समेत कई लोग एक नीली मारुति कार से निर्माण स्थल पर पहुंचे और हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग कर दहशत फैलाई। घटना के दौरान वहां मौजूद मजदूरों और कर्मचारियों के साथ मारपीट किए जाने तथा खड़े ट्रक के टायर में गोली मारकर उसे पंक्चर करने का भी आरोप लगाया गया था।

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इस मामले में ठेकेदार सरफराज अंसारी ने सैदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आरोपियों ने निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाई, कर्मचारियों को धमकाया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। घटना उस समय काफी चर्चा में रही थी और लंबे समय तक इसकी न्यायिक प्रक्रिया चलती रही।

सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का परीक्षण करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूतन द्विवेदी ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। इसी आधार पर अदालत ने बृजेश सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

करीब तीन दशक से अधिक समय तक न्यायालय में लंबित रहे इस मामले में आए फैसले के बाद इसकी न्यायिक प्रक्रिया समाप्त हो गई। यह प्रकरण अपने समय के चर्चित मामलों में शामिल रहा था और बुधवार को अदालत के निर्णय के साथ इसका औपचारिक पटाक्षेप हो गया।
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