पूर्वांचल और देश के अधिकांश हिस्सों में कोहरे का असर विमान और ट्रेन संचालन पर पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से वंदे भारत सहित छह ट्रेनें देरी से वाराणसी पहुंच रही हैं। बृहस्पतिवार को नई दिल्ली से अपराह्न 3 बजे चलने वाली वंदे भारत ट्रेन 10 घंटे बाद ही चली। वहीं, स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 9 घंटे की देरी से वाराणसी स्टेशन पहुंची।
सबसे अधिक ट्रेनें कानपुर से प्रयागराज और वाराणसी के बीच लेट हो रही हैं। वाराणसी और नई दिल्ली के बीच आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या हर दिन करीब 20 हजार से अधिक रहती है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार वाराणसी और बनारस स्टेशन पर आते हैं। पिछले एक सप्ताह से हर दिन वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ ही राजधानी, शिवगंगा, स्वतंत्रता सेनानी, लिच्छवी एक्सप्रेस, नई दिल्ली बनारस सुपरफास्ट एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस लेट हो रही हैं। कुछ ट्रेनें दिल्ली से समय पर खुलती हैं, लेकिन कानपुर और प्रयागराज होते हुए वाराणसी पहुंचने पर देर हो जाती हैं।
ट्रेनों की स्थिति
- 22416 वंदे भारत एक्सप्रेस: नई दिल्ली से अपराह्न 3 बजे चलकर रात 11 बजे पहुंचना था। यह ट्रेन 10 घंटे बाद, 26 दिसंबर की रात 1 बजे दिल्ली से चली।
- 12392 श्रमजीवी एक्सप्रेस: सुबह 2.35 बजे की जगह 2 घंटे 20 मिनट की देरी से 4.55 बजे वाराणसी पहुंची।
- 14006 लिच्छवी एक्सप्रेस: सुबह 6 बजे से 2 घंटे 50 मिनट लेट होकर 8.50 बजे आई।
- 12560 शिवगंगा एक्सप्रेस: सुबह 6.10 बजे की जगह 6 घंटे 10 मिनट की देरी से दोपहर 12.20 बजे पहुंची।
- 12562 स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस: सुबह 8.05 बजे की जगह 9 घंटे 20 मिनट की देरी से शाम 5.25 बजे आई।
- 12582 बनारस सुपरफास्ट एक्सप्रेस: सुबह 10 बजे से 6 घंटे 45 मिनट लेट होकर शाम 4.45 बजे पहुंची।
- 22177 महानगरी एक्सप्रेस (लोकमान्य तिलक टर्मिनस): सुबह 3.35 बजे से 1 घंटा 50 मिनट की देरी से 5.25 बजे आई।
एक समान पैटर्न के बजाय कहीं प्रचंड कोहरे के कारण दृश्यता शून्य रही, तो कहीं थोड़ा आगे बढ़ने पर 500 मीटर तक सड़क साफ दिखी। जिस तरह ऊंची पहाड़ियों से हवा के साथ कोहरा घाटियों में उतरता है, ठीक उसी तरह काशी में थोड़ी दूरी पर ही कोहरे के तेवर बदलते नजर आए।
पछुआ के साथ उड़ रहा कोहरा बर्फीले पानी की तरह शरीर के रोम-रोम में ठिठुरन भर दे रहा है। ठंड का असर और बढ़ता जा रहा है। कोहरा जैसे ही पड़ना शुरू हो रहा है, वैसे ही पारा अचानक 5–7 डिग्री तक लुढ़क जा रहा है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, मैदानों में हवा के साथ उड़ता कोहरा पहाड़ों के मुकाबले अधिक खतरनाक होता है, क्योंकि पहाड़ी कोहरे में केवल पानी की बूंदें होती हैं, जबकि मैदानी हवा में पानी के साथ प्रदूषक तत्व भी शामिल होते हैं।
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फिर से दृश्यता 50 मीटर से नीचे
बृहस्पतिवार को जिले में रात 9 बजे तक ही दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। इसके चलते काशी को एक बार फिर कोल्ड डे सिटी घोषित किया गया। न्यूनतम तापमान बुधवार के मुकाबले दो डिग्री नीचे लुढ़ककर 9.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। वहीं दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 6.6 डिग्री नीचे 16.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोल्ड डे के चलते काशी में कड़ाके की ठंड जारी है। जिले में अगले दो दिनों तक कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया गया है।