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घाटों से अब गलियों की ओर बढने लगी हैं गंगा

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बढ़ते जलस्तर के कारण सुरसरि अब काशी में विकराल रूप लेने की ओर अग्रसर हैं। गंगा घाटों का संपर्क तो पहले ही समाप्त हो चुका था लेकिन अब घाटों से गलियों की ओर गंगा कभी भी बढ़ सकती हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार की रात 9 बजे गंगा का जलस्तर 67. 39 मीटर पहुंच गया था। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है।
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शनिवार को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक गंगा की रफ्तार एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा रही, लेकिन शाम को पांच बजे से जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा की बढ़ोतरी शुरू हो गई। पिछले 24 घंटे में गंगा का जलस्तर 56 सेंटीमीटर और 36 घंटों में 72 सेंटीमीटर बढ़ा। शुक्रवार को सुबह आठ बजे तक जलस्तर 66.65 मीटर था जो शनिवार को सुबह आठ बजे तक 67.21 मीटर हो गया। रात 8 बजे जलस्तर 67.37 मीटर दर्ज किया गया। काशी में गंगा के बढ़ाव का कारण प्रयागराज में गंगा की प्रमुख सहायक नदी यमुना के जलस्तर में हुई भारी वृ़द्धि है। कानपुर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का वाटर लेवल तेजी से बढ़ा और इसका फ्लो मिर्जापुर होते हुए काशी पहुंच रहा है। प्रयागराज और फाफामऊ में गंगा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है लेकिन मिर्जापुर में बढ़ाव जारी है।
बढ़ते जलस्तर ने मणिकर्णिका घाट से सिंधिया घाट को जोड़ते रास्ते को पहले ही जलमग्न कर दिया था और अब वहां नाव चल रही है। दूसरी ओर दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता मंदिर की मुख्य सीढि़यां पूरी तरह डूब चुकी हैं। हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए अब अंतिम प्लेटफार्म ही बचा हुआ है और शनिवार को इसी जगह पर दाह संस्कार होता रहा। जगह की कमी के चलते कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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