यूपी के चंदौली से शनिवार की देर रात पकड़े गए पांच संदिग्ध व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक निकले। आरोपी यहां फर्जी नाम से रह रहे थे। उन्हें और उनके एक स्थानीय मददगार को पुलिस ने रविवार को जेल भेज दिया। पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिकों को देश में लाने वाले कोलकाता के आलम नामक आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है।
रविवार को पुलिस लाइन में एसपी संतोष सिंह ने बताया कि पुलिस ने शनिवार को दुलहीपुर से बांग्लादेशी नागरिक मो. फारूक परमानिक, मो. मानिक सरदार, जुल्फिकार, मो. मामून अली, मो. नुरुल इस्लाम तथा उनके स्थानीय मददगार मो. शकील उर्फ गुड्डू अंसारी को हिरासत में लिया था। इनके पास से चार फर्जी मतदाता पहचान पत्र और हाईस्कूल की आठ फर्जी मार्कशीट और 42 हजार रुपये बरामद हुए हैं। आरोपी फर्जी नाम से यहां रह रहे थेे।
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इन पांचों को देश में लाने में कोलकाता के आलम नामक की भूमिका है। अधिक पैसे कमाने का लालच देकर वह इनको अवैध रूप से सीमा पार कराकर पश्चिम बंगाल के रास्ते ले आया था। आरोपियों के अनुसार, आलम काफी पहले बांग्लादेश गया था।
वहां उसकी मुलाकात खेत में काम करते हुए बांग्लादेशियों से हुई। आलम आठ लोगों को अधिक पैसे कमाने का लालच देकर ले आया था। वह हिली बार्डर पार कर मालदा पहुंचा वहां से ट्रेन पकड़कर पीडीडीयू जंक्शन पहुंचा था। आलम सभी को दुलहीपुर स्थित एजाज का घर किराए पर दिलाकर ससुराल बिहार चला गया।
पुलिस मार रही हाथ-पांव
बांग्लादेश से देश की सीमा पार कर यूपी में घुसे बांग्लादेशियों की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है। पकड़े गए आरोपियों को लाने वाला यानी मुख्य आरोपी आलम सहित अभी चार लोग फरार है। पुलिस इनकी तलाश कर रही है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है।
पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आलम के साथ आठ बांग्लादेशी ट्रेन से पीडीडीयू जंक्शन उतरकर दुलहीपुर पहुंचे थे। लेकिन, अभी पांच बांग्लादेशी ही पकड़े गए हैं। आलम सहित चार फरार हैं। फर्जी आईडी बनाने वाले वकील का नाम भी सामने आया है। पुलिस उस तक भी अभी नहीं पहुंच सकी है।
दरअसल, ट्रेन से आने का आसान रास्ता होने के कारण बांग्लादेशी सीधे पीडीडीयू जंक्शन पहुंचते हैं और वहां से आसपास के गांवों में काम की तलाश में चले जाते हैं। दुलहीपुर, सतपोखरी, मलोखर, चंदासी के साथ ही पीडीडीयू नगर के मुहल्लों शाहकुटी, कसाब महाल, काली महाल में किराए के घर में बड़ी संख्या में बाहरी लोग रह रहे हैं। लेकिन, कोतवाली पुलिस ने कभी इनका सत्यापन करने की जरूरत नहीं समझी।
बांग्लादेशियों ने मार्कशीट और मतदाता पहचान पत्र पर भी नाम बदल लिए थे। मो. फारूक परमानिक ने फारूक अंसारी, मो. मानिक सरदार ने राजू खां, जुल्फिकार ने चंदन, मो. मामून अली ने रिंकू यादव और मो. नुरूल इस्लाम ने बाबू खां नाम रख लिया था।