गांव-गांव में भ्रमण कर लोगों से फाइनेस संबंधित पैसा व लोन कराता है। पुलिस की पूछताछ में आनंद ने बताया कि वह लोगों से आधार कार्ड व पैन कार्ड, फोटो आदि व बैंक विवरण आदि लेता था और धर्मेंद्र यादव के गांव में फ्यूजन माइक्रो फाइनेंस का काम करता था।
धर्मेंद्र के माध्यम से अभिषेक उर्फ ऋषि यादव व सुजीत यादव से परिचय हुआ था, अभिषेक उर्फ ऋषि यादव भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी में काम कर चुका है और शिवानंद से वर्ष 2020 में परिचय हुआ था। सभी लोग अपने-अपने मोबाइल के माध्यम से डाटा कलेक्शन से प्राप्त दस्तावेज को एक दूसरे से आपस में साझा करते थे और शिवाकांत कूटरचना करके दस्तावेजों को फर्जी रूप से तैयार करता था। उसके माध्यम के फर्जी नाम व पता पर विभिन्न लोन कंपनियों से लोन लेने का काम व मोबाइल, इलेट्रॉनिक सामान ईएमआई पर लेते थे।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह इस तरह से वह सारनाथ के दानियालपुर निवासी राजकुमार के आधार व पैन कार्ड को कंप्यूटर के जरिये छेड़छाड़ और कूटरचना कर धोखे से राजकुमार के नाम से फर्जी आधार व पैन कार्ड पर सुजीत कुमार का फोटो लगाया।
वहीं, राजकुमार के बैंक खाता संख्या से ऑनलाइन किस्त पर 45 हजार का मोबाइल और होम थियेटर खरीदा। नाम व पता राजकुमार के फर्जी दस्तावेज पर फाइनेंस कराया गया था। कई फाइनेंस कंपनियां छोटे-छोटे लोन केवल आधार कार्ड पर दे देतीं हैं और किस्त नहीं भरने के कारण जब कंपनी वाले आधार कार्ड के पते पर जाते है तो वहां कोई नहीं मिलता।
साइबर क्राइम के तकनीकी विशेषज्ञ श्याम लाल गुप्ता ने बताया कि राजकुमार का बैंक खाता विवरण देकर सभी आरोपी फंस गए। मोबाइल कंपनी वाला पहले राजकुमार के फर्जी पते पर गया। जब कोई नहीं मिला तब तक वह बैंक खाता धारक के पास गया। जब राजकुमार से बैंक कर्मियों ने मुलाकात की तो फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया। जब राजकुमार ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया।