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Varanasi News : सिय पिय विवाह महोत्सव, शबरी के चरित्र से सामाजिक वैमनस्य होगा समाप्त; जानें पूरी खबर

Fri, 29 Nov 2024 11:09 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

संपूर्णानंद मैदान में 55 वें श्री सिय पिय मिलन महा महोत्सव की शुरूआत से आने वाले दिनों ने समाज को दिशा मिलेगी। शिव विवाह के पावन प्रसंग से शुरूआत हुई।  महोत्सव के प्रथम दिन शबरी की कथा ने जनता पर अलग छाप छोड़ी। नौ दिनों तक यहां भक्ति के महाआनंद की प्राप्ति होनी है।
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नौ दिवसीय सिय पिय महा महोत्सव की शुरूआत - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अयोध्या से पधारे संत नरहरि दास महाराज ने कहा कि प्रभु सिर्फ भक्त के भाव देखते हैं ना कि उसकी जाति। भगवत वरण चारों वर्णों के अधिकार हैं। शबरी का चरित्र चारों वर्णों के लिए अनुकरणीय है, यदि उनके चरित्र को सही ढंग से समझें तो समाज से आपसी वैमनस्य ही समाप्त हो जाएगा। वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में 55वें श्री सिय पिय मिलन महामहोत्सव के पहले दिन प्रवचन दे रहे थे।

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नौ दिवसीय रामलीला का भी शुभारंभ हुआ। पहले दिन शिव विवाह लीला का मंचन हुआ। लीला की शुरुआत माता पार्वती की बाल्यावस्था से लेकर उनकी कठोर तपस्या का भी मंचन किया। लीला का निर्देशन अशोक मिश्रा, मंच संयोजन जयशंकर तिवारी ने किया। 

भगवान शिव की भूमिका सौरभ, ब्रह्मा की भूमिका अखिल प्रताप, पार्वती की भूमिका हर्ष, कौशल्या की भूमिका सीताराम चतुर्वेदी एवं नारद की भूमिका हरि प्रताप ने निभाई। 40 लोगों ने सामूहिक श्रीरामचरितमानस के नवाह्न पारायण का भी शुभारंभ हुआ। 
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विवाह महोत्सव के पहले दिन सिया दीदी, वृंदावन के संत प्रवर गौतम बाबा सरकार, अशोक अग्रवाल गुरुकृपा, संजय अग्रवाल अग्गू, कृष्ण कुमार खेमका व्यासपीठ की आरती में शामिल रहे। 



वेद-पुराणों के अनुसार आचरण करें
औघड़ बाबा गुरुपद संभव राम ने कहा कि यदि हम वेद-पुराण पढ़ लें और उसके अनुरूप आचरण न करें तो हमारा पढ़ना व्यर्थ है। वह शुक्रवार को पड़ाव स्थित अघोरेश्वर महाविभूति स्थल के प्रांगण में अघोरेश्वर भगवान राम के 33वें महानिर्वाण दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले सुबह लोगों ने श्रमदान किया। पृथ्वीपाल ने सफलयोनि का पाठ किया। फिर हवन किया गया।

अध्यक्षता डॉ. वीपी सिंह ने की। मंगलाचरण यशवंत नाथ शाहदेव, संचालन मानवेंद्र सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एसपी सिंह ने किया। उधर, अघोरपीठ बाबा कीनाराम स्थल क्रीं कुंड में सुबह साफ-सफाई और दैनिक आरती के बाद महानिर्वाण दिवस का कार्यक्रम शुरू हुआ। क्रीं कुंड पीठ के पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के दिशा-निर्देशन में अघोरेश्वर महाप्रभु की आरती की गई और प्रसाद अर्पित किया गया।

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15 विद्वानों ने किया शास्त्रार्थ
बीएचयू में अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा के दूसरे दिन विद्वानों ने संस्कृत की अलग विधाओं के धारा प्रवाह श्लोक सुनाए। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पूरे आठ घंटे तक शास्त्रार्थ चला। 15 से ज्यादा विषयों पर सवाल-जवाब किए गए। भारतीय प्राचीन शास्त्रों के विद्वानों को सुनने करीब 100 से ज्यादा छात्र कार्यक्रम हॉल में मौजूद रहे।

उज्जैन से आए भारतीय दर्शन शास्त्र के प्रकांड विद्वान आचार्य संदीप शर्मा ने भारतीय दर्शन शास्त्रों में प्रमाण की संख्या और स्वरूप पर अपना शास्त्रार्थ किया। शृंगेरी, कर्नाटक से आए हुए वेदांत, न्याय, मीमांसा के विद्वान आचार्य गणेश ईश्वर भट्ट ने अदृश्यत्वाधिकरण विषय पर अपना गंभीर शास्त्रार्थ प्रस्तुत किया। जयपुर से आए आचार्य राम कुमार ने व्याकरण और साहित्य के श्लोक सुनाए। 
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