नए साल के पहले दिन सैलानियों से सारनाथ गुलजार हो उठा। वाराणसी समेत न केवल पूर्वांचल बल्कि विभिन्न राज्यों और विदेशों से सैलानी सारनाथ घूमने पहुंचे। दर्शन, भ्रमण और पिकनिक के लिए सवा लाख से अधिक लोग यहां पहुंचे।
यह अनुमान खुफिया एजेंसियों और एएसआई का है। धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, खंडहर परिसर, महाबोधि मंदिर, म्यूजियम से चिड़ियाघर तक सैलानियों की आवाजाही से मेले जैसा नजारा था।
हर किसी ने अपनी-अपनी तरह से नए साल के पहले दिन की यादों को संजोया। हालांकि भीड़ के जबरदस्त दबाव से सुबह से ही पूरा क्षेत्र जाम से कराहता रहा। इससे सैलानियों और आम लोगों को दिक्कतें हुईं।
नए साल का पहला दिन और रविवार की छुट्टी। लोगों को पिकनिक मनाने का शानदार मौका मिला। धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप के अलावा खंडहर परिसर में रेला लगा था।
महाबोधि मंदिर में भी दर्शन-पूजन के लिए कतार लगी रही। म्यूजियम, चिड़ियाघर और अन्य बौद्ध विहारों में भी सुबह से शाम तक सैलानियों की आवाजाही लगी रही।
मेले से नजारे के बीच चाट, बर्गर, चाऊमीन और हस्तशिल्प उत्पादों की तमाम अस्थाई दूकानें लगी थीं। भीड़ के दबाव और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से तीन से पांच किलोमीटर तक लंबा जाम लगा। लोग घंटों इसमें परेशान हुए।
नए साल का पहला दिन और सैलानियों की भीड़ उमड़ने की संभावना पहले से होने के बावजूद यातायात महकमे ने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए कोई पहल नहीं की। इससे मुश्किलें और बढ़ीं।
धरोहरों की सुरक्षा पर भी नजर नहीं
सैलानियों और आम लोगों के जबरदस्त हुजूम के बीच धरोहरों की सुरक्षा की अनदेखी होती रही। तमाम लोग चौखंडी स्तूप के ऊपर घूमते-टहलते रहे। यही हाल धमेख स्तूप और खंडहर परिसर स्थित कई धरोहरों का रहा। विदेशी सैलानियों से पैसा ऐंठने और अधिक पुण्य का झांसा देकर खाते में पत्थर के टुकड़े बांधकर धमेख स्तूप पर फेंकने वाले भी मौके का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहे। वहीं उचक्कों ने भीड़ का फायदा उठाकर दर्जन भर से अधिक लोगों के मोबाइल उड़ा दिए।