सेंट्रल बार एसोसिएशन की 114 साल पुरानी लाइब्रेरी में मंगलवार को बनारस क्लब से जुड़े पुराने शासनादेश की प्रति की तलाश की गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि लाइब्रेरी में आजादी के पूर्व के अन्य शासनादेश तो हैं लेकिन जिस शासनादेश के तहत 27 जून, 1935 को तत्कालीन डीएम ने बनारस क्लब को दो एकड़ जमीन रजिस्ट्री की थी, वह आज उन्हें नहीं मिल पाया।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह प्रिंस, महामंत्री ओमप्रकाश पांडेय, बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय समेत अधिवक्ताओं ने घंटों लाइब्रेरी में शासनादेश की खोजबीन के लिए माथापच्ची की। अशोक सिंह का कहना है कि अगर बैनामा फर्जी साबित हुआ तो इस मामले में कसूरवार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सिंह ने कहा कि पूर्व महामंत्री राय के प्रस्ताव पर प्रकरण में बार एसोसिएशन की जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
बता दें कि बनारस क्लब ने अपनी कब्जे वाली जमीन से जुड़े कागजात जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र की ओर से एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी को सौंप दिए हैं। जांच समिति फिलहाल इन कागजातों की जांच कर रही है। मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त की निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा बैठक के कारण जांच की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।