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स्नातक और परास्नातक की अंतिम वर्ष की परीक्षा कराई जाए

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वाराणसी। कोरोना संक्रमण काल में विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में परीक्षा कराने पर मंथन चल रहा है। शासन ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उच्च शिक्षा संवर्ग ने भी समिति को अपना सुझाव भेज दिया है। बृहस्पतिवार को ऑनलाइन बैठक में समिति ने सुझाव दिया कि स्नातक व परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अवश्य कराई जाएं। संक्रमण काल को देख थोड़ा रुका जा सकता है। छात्रों व शिक्षकों को कोराना से बचाने के लिए तृतीय वर्ष के संवर्ग विज्ञान व कृषि संवर्ग, वाणिज्य व कला संकाय की परीक्षा सुबह-शाम के पालियों में कराई जा सकती है। इससे परीक्षा केंद्रों पर भीड़ नहीं होगी। परीक्षा का समय दो घंटे का हो और प्रश्नों की संख्या भी उसी अनुसार हो। प्रथम व द्वितीय वर्ष के लिए जहां सेमेस्टर प्रणाली लागू हो वहां आंतरिक परीक्षा के आधार पर अंक दिए जा सकते हैं। जिन पाठ्यक्रमों में वार्षिक परीक्षा का प्रावधान है, वहां पिछले वर्ष की भांति निर्धारित मानकों के आधार पर प्रोन्नत किया जा सकता है। जहां प्रायोगिक विषय हैं वहां प्रोजेक्ट रिपोर्ट से काम चलाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उच्च शिक्षा संवर्ग के अध्यक्ष प्रो. लवकुश मिश्र ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के काशी के प्राध्यापकों से ऑनलाइन परिचर्चा में यह बातें बताईं। संचालन डॉ. उदयन मिश्र ने किया। डॉ. बब्बन सिंह, डॉ. विजय राय, डॉ. नरेंद्र राय, डॉ. जगदीश, प्रो. शैलेश मिश्र, डॉ. कुलदीप, डॉ. अमिताभ तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।
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