तबला वादक पंडित सुरेश तलवरकर के साथ उनकी बेटी सावनी तलवलकर
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संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा कैजोल के सम्मोहन में बंधी रही। संगीत के महाकुंभ में कैजोल को ताल कीर्तन के संयोजन में पेश किया गया। पांचवीं निशा के दूसरे चरण में ताल कीर्तन पर श्रोता और दर्शक झूम उठे। पाश्चात्य वाद्य यंत्र कैजोल और ड्रम इन दोनों पर ही तबले की बेजोड़ संगत ने सुधि दर्शकों के संगीत की पिपासा को शांत किया।
पांचवीं निशा के दूसरे चरण में तबला वादक पंडित सुरेश तलवरकर के साथ उनकी बेटी सावनी तलवलकर, पखावज पर ओंकार दर्वी, कैजोल पर उमेश वारभुवन और वेस्टर्न ड्रम पर अभिषेक गुरुक ने झपताल की बंदिशों, टुकड़ों तिहाइयों और रेलों को संगीत के सुरों में पिरोया।
गायन विनय रामदास और हारमोनियम पर संगत मिलिंद कुलकर्णी ने की। इससे पूर्व पंडित कादरी गोपाल ने सेक्सोफोन पर उपशास्त्रीय धुनों की बहार छेड़ी। उन्होंने अपने गायन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास जी और संत तुकाराम के भजनों के अलावा बापू के प्रिय भजन की धुन भी बजाई।
तालवाद्य कचहरी के रूप में मंचासीन उनकी शिष्य मंडली ने वायलिन, पखावज और तबला की संगत से माहौल को एक अलग ही रंग में रंग दिया। वायलिन पर कन्याकुमारी का वादन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा।