हादसे के बाद लगी भीड़।
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वहीं विवेक गुजरात की स्टील कंपनी में काम करता था और वह 15 दिन पहले लौटा था। उन्हें नहीं पता था कि त्योहार पर खुशियां मनाने घर आना उनका आखिरी सफर है। घटना से तीनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है। वहीं पूरे गांव में शोक है। कोई नहीं जानता था कि त्योहारी खुशियों के बीच इतनी बड़ी आफत आ जाएगी। इनका दोस्त पुनीत हाईस्कूल का छात्र था। वह चार भाइयों में सबसे छोटा था। मिर्जापुर जिले के लोहरापुर के एक स्कूल में पढ़ता था। उसके पिता मुंबई में दिहाड़ी पर मजदूरी का कार्य करते हैं। इस हादसे ने तीनों परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दीं।
इसी बाइक पर सवार थे तीनों।
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चार बहनों की थी जिम्मेदारी, अब अकेले पड़ गए पिता
घटना में जान गंवाने वाला सूरज पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। वह और उसके पिता परिवार की आजीविका चलाने के लिए बाहर काम करते हैं। पिता पप्पू बिंद मुंबई में मजदूरी करते हैं। पप्पू से चार-चार छोटी बेटियां हैं। अभी किसी की शादी भी नहीं हुई है। इन सबकी जिम्मेदारी सूरज और उनके पिता पर थी, लेकिन सूरज की मौत के बाद अब पिता अकेले पड़ गए हैं।
पुनीत, विवेक और सूरज की फाइल फोटो।
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उजड़ गया सुहाग, अनाथ हो गए दो बच्चे
29 साल के विवेक चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह और उसके पिता चुन्नी लाल गुजरात की स्टील कंपनी में काम करते हैं। उससे एक ढाई और दूसरा डेढ़ साल का बेटा है। विवेक की मौत के बाद उसकी पत्नी गुड़िया का रो-रोकर बुरा हाल है। पति की मौत से एक तरफ उसका सुहाग उजड़ गया, वहीं दूसरी तरफ उसके दोनों बच्चे भी अनाथ हो गए। उसका करुण क्रंदन सुनकर हर किसी के आंखों में आंसू आ जा रहे थे।