वाराणसी। कुर्बाना का पर्व ईद उल अजहा सादगी और सफाई के साथ मनाया जाएगा। सब्र के साथ इबादत होगी और कुर्बानी का फर्ज अदा किया जाएगा। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सभी से सोशल डिस्टेंसिंग और सफाई पर खास ध्यान रखने का आह्वान किया है।
इस बार बकरीद की महंगाई की मार पड़ी है। कुर्बानी के जानवरों की कीमत बढ़ने से लोग परेशान हैं। कुर्बानी के पर्व बकरीद पर कोरोना संक्रमण की छाया पड़ गई है। एक तरफ जहां सोशल डिस्टेंसिंग और सब्र के साथ त्योहार मनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं जानवरों पर बढ़ी हुई कीमत ने परेशान कर रखा है। जानवरों की मंडी नहीं लगने के कारण दूसरे प्रदेशों से जानवर नहीं आए हैं। आसपास के जिलों, गांव और कस्बों से जानवर बेचने वाले पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके नाम पिछले साल के मुकाबले दो से चार हजार रुपये तक ज्यादा हैं।
आमद कम होने से बढ़े भाव
शहर में कई जगहों पर मुस्लिम इलाकों में पांच-छह की संख्या में जानवरों की बिक्री हो रही है। जानवरों की आमद कम होने के कारण उनके भाव अब आसमान छू रहे हैं। यही हाल रहा तो बकरीद के नजदीक आते-आते कीमतें आम आदमी पहुंच से बाहर हो जाएंगी। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने अपील की है कि साफ-सफाई ज्यादा रखें। खुले में कुर्बानी न करें। मास्क लगाकर ही जानवरों की खरीद-फरोख्त करें।