मऊ जिले के रानीपुर थाना क्षेत्र के दौलसेपुर गांव में रविवार को चिता जलाकर उस पर बैठने का प्रदर्शन करने की तैयारी रहे पिता-पुत्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दोनों को अंधविश्वास फैलाने आदि की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
दौलसेपुर गांव निवासी बालचंद राजभर (70) स्व.बरखू घर पर खेतीबाड़ी का काम करता है। वह एक हफ्ते दो हफ्ते और तीन हफ्ते तक उपवास रहकर पूजा-पाठ करता है। वह पिछले एक सप्ताह से ध्यान लगाकर पूजा- पाठ कर रहा था। इसी क्रम में रविवार की सुबह घर वालों पड़ोसियों और गांव वालों से कहा कि आज मैं अग्नि परीक्षा दूंगा। बुजुर्ग के कहने के अनुसार परिवार वालों ने दरवाजे के पास गाय के गोबर से लीप पोत कर चिता सजाने के लिए लकड़ी एकत्र किया। दरवाजे के पास पेड़ पर लाउडस्पीकर बांध कर इस बात का ऐलान किया जा रहा था कि बालचंद इसके पहले दिल्ली में दो बार 21 दिनों तक उपवास करके ऐसा उपक्रम कर चुका है। इसके बाद एक एक सप्ताह तक चार बार उपवास के साथ पूजा कर चुका है। उपवास और पूजा पाठ के क्रम में सातवीं बार वह घर पर एक सप्ताह से बालचंद उपवास पर बैठ कर ध्यान लगाया था।
बालचंद ने अपनी पत्नी तेतरी और बेटे भगवान से कहा कि वह अंतिम बार अग्नि परीक्षा देने जा रहा है। गाय के गोबर से जमीन लीप कर चौका बनाओ और ढे़र सारी लकड़ी इकट्ठा करके आग जलाओ। मैं जलती चिता पर बैठूंगा और सुरक्षित बाहर निकल आऊंगा। बुजुर्ग के कथनानुसार परिवारी जन तैयारी कर रहे थे। इस मौके पर ग्रामीणों की काफी एकत्र हो गई थी। इसी दौरान किसी ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। कुछ ही देर में खुरहट पुलिस चौकी प्रभारी अनिल द्विवेदी दल बल मौके पर पहुंच गए। उन्होंने प्रभारी थानाध्यक्ष रानीपुर अशोक कुमार यादव को प्रकरण की जानकारी दी। मौके पर पहुंचे एसओ ने बालचंद और भगवान को हिरासत में लेकर भेज दिया। पुलिस ने दोनों के विरुद्ध शांति भंग की आशंका की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर एसडीएम कोर्ट मुहम्मदबाद गोहना चालान कर दिया। वहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया।इस मामले में एसओ का कहना था कि दोनों आडंबर और अंधविश्वास फैला रहे थे। दोनों के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया जाएगा।