नम्रता ने कहा कि पिताजी की पूरी बात और पूरा जीवन अनुशरण करने योग्य है। सगीत, अध्यात्म, ठुमरी, चैती, कजरी का वे अद्भुत तरीके से विश्लेषण करते थे। यही कारण है कि देश ही नहीं विदेशों में भी उनके प्रशंसक आज भी उनसे कुछ न कुछ सीखते रहे। उनके गाने में एक समझ होती थी, जिसे आम आदमी भी महससू कर लेता था कि पिताजी क्या कहना चाहते हैं।
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की बेटी प्रो. नम्रता मिश्रा ने बताया कि गृहमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आया था। इससे पहले मिर्जापुर के कमिश्नर और जिलाधिकारी ने भी फोन से वार्तालाप की। पूरे राजकीय सम्मान के साथ पिताजी के पार्थिक शरीर को काशी लेकर जाया जाएगा। इसके लिए वाराणसी प्रशासन से भी बातचीत हुई है। वहां पर भी पूरी व्यवस्था शुरू कर दी गई है। मिर्जापुर में भाजपा, संघ परिवार के लोगों ने आवास पर आकर अपनी संवेदना जताई है।
उन्होंने बताया कि पिताजी का निधन गुरुवार की सुबह करीब सवा 4 बजे हुआ। डाॅक्टर ने पूरे परीक्षण के बाद इसकी जानकारी हम लोगों को दी। 5 बजे तक सैकड़ों लोग आवास पर पहुंच गए थे। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। बेड सोर हो जाने के बाद उन्हें खून की कमी हो गई थी। खून चढ़ाने के बाद आराम नहीं हुआ तो कुछ दिन तक बीएचयू अस्पताल में भी इलाज चला। इसके बाद पुन: मिर्जापुर स्थित आवास पर लाया गया।