बाबा विश्वनाथ की नगरी में सावन में फैशन पर भी आध्यात्मिक रंग चढ़ गया है। इस सीजन में टैटू ट्रेंड भी बदल गया है। पारंपरिक तरीकों से इतर युवा महादेव, शिवाय, ऊं और त्रिशूल के आकर्षक टैटू बनवा रहे हैं।
युवतियां भी पीछे नही हैं और वे थंब टैटू बनवा रही हैं। कूल दिखने के साथ ही ग्रहों की शांति के लिए भी यह कराया जा रहा है। वाराणसी में पूरे सावन पर्व जैसा माहौल होता है। फैशन में कुछ नया करते रहने वाले युवा सावन में टैटू को आध्यात्मिक टच दे रहे हैं।
बांह और गर्दन पर भगवान शंकर के रौद्र रू प, त्रिशूल, डमरू, ऊं आदि बनवा रहे हैं। भुजा पर हिंदी, अंग्रेजी में ‘महादेव’, ‘शिवा’, त्रिशूल आदि बनवा रहे हैं। पीठ पर भी कुछ टेंपररी और फ्रेशर टैटू बनवा रहे हैं। युवतियां थंब पर त्रिशूल और ऊं लिखवा रही हैं।
विशेश्वरगंज इलाके की सुधा बताती हैं कि यह कूल दिखने के साथ ही बुरी बलाओं से भी बचाता है। ग्रह शांति में भी यह लाभदायक है।
टेंपररी और परमानेंट, दोनों विकल्प
टैटू को ज्यादातर युवा पसंद करते हैं पर कुछ इसलिए भी नहीं बनवाते की यह हमेशा के लिए हो जाएगा। टैटू के दोनों विकल्प मौजूद हैं, टेंपररी और परमानेंट। जहां टेंपररी और फ्रेशर कुछ दिन के लिए होता है तो परमानेंट स्थायी होता है। छोटा मॉल के संचालक अशोक कुमार गोगिया बताते हैं कि फ्रेशर और टेंपररी टैटू साइज के हिसाब से लगाए जाते हैं। फ्रेशर की शुरुआत 150-200 रुपये से तो परमानेंट 600 रुपये से शुरू होता है।
थंब प्रिंट का का नया ट्रेंड
अभी तक लोग बांह, भुजा, गर्दन और पीठ पर टैटू बनवाते थे। अब थंब प्रिंट का तेजी से चलन चला है। इसमें अंगूठे के पीछे, आगे दोनों तरफ छोटे टैटू बनाए जाते हैं, जिनमें नाम, कोई आकर्षक चित्र आदि हो सकता है।