kashi hindu vishwavidyalay bhu
- फोटो : kashi hindu vishwavidyalay bhu
पिछले हफ्ते राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ बी आर मणि के साथ बीएचयू की टीम ने यहां पर बिखरी सामग्री को देखा और उन सामग्रियों के आधार पर इस स्थल को कुषाण काल के पूर्व के होने की बात ग्रामीणों से बताई।
पुरावशेषों में ब्राम्हीलिपि भी शामिल
पंचक्रोशी मार्ग पर सर्वेक्षण के दौरान जो पुरावशेष मिले हैं, उसमें ब्राम्ही लिपि के आलेख भी शामिल हैं। इसको देखने से दो हजार साल पुराना होने की संभावनाएं हैं, जांच के बाद ही सही पता चल सकेगा। बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह के मुताबिक कुछ पत्थर ऐसे हैं जो आधा गढ़े हैं, शिवलिंग बन गए हैं। शिवलिंग के ऊपर ही आलेख है।
बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से अब तक सारनाथ, चंदौली सहित कई जगहों पर खुदाई कर चुकी है। प्रो. ओएन सिंह ने बताया कि पंचक्रोशी मार्ग पर इन अवशेषों के मिलने का महत्व अधिक है। पंचक्रोशी परिक्रमा से तीन किलोमीटर उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ सर्वेक्षण कराया गया है।
यहां से जानकारी मिलने के बाद अब खुदाई के बाद जांच में इसके सही उम्र का पता लग सकेगा। कहा कि गांव में मिले एक टीले की खुदाई के दौरान भी कई पुरावशेषों के मिलने का अनुमान है। सर्वेक्षण के दौरान जो मातृदेवी की प्रतिमा, नार्दन ब्लैक पालिश के बर्तन मिलने की भी जानकारी मिली है।