बैठे बरासन रामु जानकि मुदित मन दसरथु भए, तनु पुलक पुनि पुनि देखि अपनें सुकृत सुरतरु पल नए॥ भरि भुवन रहा उछाहु राम बिबाहु भा सबहीं कहा। केहि भांति बरनि सिरात रसना एक यहु मंगलु महा...। यानी श्री रामजी और जानकीजी श्रेष्ठ आसन पर बैठे।
उन्हें देख दशरथजी मन में आनंदित हुए। अपने सुकृत रूपी कल्प वृक्ष में नए फल (आए) देखकर उनका शरीर बार-बार पुलकित हो रहा है। चौदहों भुवनों में उत्साह भर गया, सबने कहा कि श्री रामचंद्रजी का विवाह हो गया। जीभ एक है और यह मंगल महान है, फिर भला, वह वर्णन करके किस प्रकार समाप्त किया जा सकता है।
रविवार की शाम को प्रभु श्रीराम और मां सीता के विवाह के साथ ही रामनगर सियाराममय हो गया। आस्था के भव सागर में हर कोई भक्ति का गोता लगा रहा था। प्रभु के विवाह के साक्षी बनकर लीलाप्रेमी निहाल हो उठे।
रामलीला के छठें दिन की लीला में अयोध्या से बरात प्रस्थान और जनकपुर में मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि विधान के साथ श्री राम जानकी विवाह संपन्न हुआ। धूमधाम से बरात निकलती है। समस्त नगरवासी झूमते नाचते चल पड़ते हैं। जलपान के लिए बरात हनुमान मंदिर पर एक बार विराम लेती है फिर जनकपुर स्थित जनवासा के लिए प्रस्थान करती है।
राजा जनक अतिथियों का स्वागत करते हैं। इसके बाद चारों भाई दूल्हा बनते हैं। भगवान शंकर बैल पर बैठकर माता पार्वती के साथ बरात में आते हैं। चारों भाइयों को विवाह मंडप में एक साथ बैठा देख अयोध्या व जनकपुर वासी अभिभूत हो उठते हैं। अयोध्या नरेश राजा दशरथ तथा राजा जनक चारों जोड़ों को आशीर्वाद देते हैं। स्वर्गलोक से पुष्पवर्षा होती है। इसके बाद लीला की आरती सम्पन्न होती है।
आधे घंटे देर से शुरू हुई रामलीला
राज्यपाल के रामनगर किले में आगमन के चलते रामनगर की रामलीला रविवार को आधे घंटे देर से शुरू हुई। राज्यपाल के किले में होने के चलते काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह व्यस्त थे। लिहाजा उनकी शाही सवारी समय से नहीं निकल सकी। काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह के एक रिश्तेदार ने साढ़े पांच बजे लीलास्थल अयोध्या पहुंचकर लीला शुरू कराई। अनंत नारायण सिंह संध्या पूजन के बाद सीधे जनकपुर पहुंच कर लीला में शामिल हुए।
कहीं अष्टसखी संवाद तो कहीं रामविवाह
शिवपुर की रामलीला में नगर दर्शन, अष्टसखी संवाद और फुलवारी की लीला हुई। जाल्हूपुर टूड़ीनगर की रामलीला में श्री अवध से बरात प्रस्थान और जनकपुर में विवाह की लीला का मंचन हुआ। मनोज उपाध्याय व ब्रह्मदेव पांडेय के नेतृत्व में रामायण मंडली विवाह गीत गाती है। इसके बाद आरती के साथ रामलीला को विराम दिया गया। भोजूबीर में महाराजा दशरथ यज्ञ, रामजन्म, विराट दर्शन, नामकरण की लीला हुई। काशीपुरा में रामलीला की शुरूआत मुकुट पूजन के साथ हुई।