गीतकार सुरेंद्र वाजपेयी ने बताया कि सनेही की गजलें रवायती ढांचे में ढली होने के बावजूद अपने अनोखे अंदाज के कारण भीड़ से अलग दिखाई देती हैं। अपने समय और समाज को बेहद सादगी के साथ चित्रित करना सनेही की खासियत थी। हिंदी उर्दू के लफ्जों को वो बहुत खूबसूरती से अपनी गजलों में ढालते थे। विगत 50 वर्षों से गजलों की अविरल धारा बहाने वाले विलक्षण शायर का जाना दुखद है।
सम्मान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का सौहार्द सम्मान, साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से सम्मान।
पुस्तक
वतन के नाम पांच फूल और ख्याल के फूल।