सभी बच्चे चार से 12 वर्ष के हैं। इस दौरान आरपीएफ ने पति-पत्नी और बच्चों को समझाया। काउंसलिंग करने के बाद परिवार को हिदायत दी गई कि भविष्य में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे। पूरा परिवार आपस मे झगड़ा न करने को राजी हुआ। उन्हें समझा-बुझाकर उनके घर के लिए भेज दिया गया। आरपीएफ डीडीयू पोस्ट निरीक्षक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि आरपीएफ जवान की सतर्कता से परिवार की जान बच गई।