जांच में सामने आया कि वर्ष 2004-05 के दौरान जौनपुर जिले के विकास खंड रामनगर में केंद्र एवं राज्य सरकार की सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत नाली, खड़ंजा, सीसी रोड, पुलिया, संपर्क मार्ग और पटरी मरम्मत जैसे विकास कार्य प्रस्तावित थे। योजना के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को मजदूरी के बदले खाद्यान्न (चावल) और नकद धनराशि दी जानी थी।
आरोप है कि तत्कालीन कार्य प्रभारियों और अन्य संबंधित लोगों ने फर्जी मस्टर रोल तैयार कर काल्पनिक श्रमिकों के नाम दर्ज किए। इसके आधार पर खाद्यान्न का वितरण दिखाया गया, जबकि वास्तविक मजदूरों को न तो खाद्यान्न मिला और न ही पूरी धनराशि। इस फर्जीवाड़े से सरकार को लगभग 1,02,536 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों में तत्कालीन कोटेदार वरिन्द्र बहादुर सिंह की भूमिका सामने आने पर उसे अभियुक्त बनाया गया। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की तलाश के लिए ईओडब्ल्यू द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के तहत शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने बताया कि मामले में अन्य आरोपितों के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई जारी है और पूरे प्रकरण की जांच के आधार पर आगे की विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।