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सावधान: आंखों में जलन, कान में दर्द को न समझें मामूली; रोज आ रहे 300 मरीज; जानें- बचाव के आसान उपाय

Sat, 05 Sep 2026 04:15 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

मौसम में बदलाव और प्रदूषण से आई फ्लू और कान में दर्द की शिकायतें लेकर रोजाना 300 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 15 फीसदी संख्या बच्चों की है। इनकी उम्र 5 से 10 वर्ष है। 
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अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौसमी संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ गया है। तापमान में उतार-चढ़ाव और धूल-प्रदूषण के चलते लोग आंख और कान की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के अस्पतालों में आंखों में कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) और कानों में तेज दर्द व बहरेपन की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

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जिले के प्रमुख अस्पतालों सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू), मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल , लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल (रामनगर) सहित विभिन्न सीएचसी-पीएचसी में रोजाना लगभग 300 मरीज ये शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 15 फीसदी संख्या बच्चों की है। इनकी उम्र 5 से 10 वर्ष है। 

बीएचयू के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग की ओपीडी में रोजाना आने वाले औसतन 300 मरीजों में से करीब 120 मरीज (लगभग 40%) केवल कान में दर्द, मवाद आने और भारीपन की शिकायत वाले हैं। 

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ईएनटी विभाग के डॉ. विशंभर सिंह बताते हैं कि मौसम में बदलाव के दौरान सर्दी-जुकाम और एलर्जी की वजह से यूस्टेशियन ट्यूब अवरुद्ध हो जाती है, जिससे मध्य कान में संक्रमण विकसित हो जाता है। कई मरीजों में कान में तेज चुभन की भी शिकायत आ रही है। मरीजों को अस्थायी रूप से कम सुनाई दे रहा है। मरीजों को दवाओं के साथ एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।

जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद प्रसाद बताते हैं कि मौसम में बदलाव और धूल के कारण आंखें लाल हो जा रही हैं। मरीजों की आंखों से लगातार चिपचिपा पानी आने की शिकायत आ रही है। इसके अलावा कुछ मरीजों में खुजली और जलन की भी समस्या है। बच्चों में भी कंजक्टिवाइटिस के लक्षण नजर आ रहे हैं। इसके कारण अस्थायी रूप से दृष्टि भी बाधित हो रही है। 
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बचाव के प्रमुख उपाय
  • आंखों को बार-बार बिना हाथ धोए न छूएं और संक्रमित व्यक्ति के तौलिए या रुमाल का उपयोग न करें।
  • कान में पानी जाने से बचाएं और माचिस की तीली, पिन या बड्स कान में बिल्कुल न डालें।
  • सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार लें ताकि संक्रमण कान तक न पहुंचे। 
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