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UP Crime: पूर्वांचल में दो दशक से चल रहा था उगाही का खेल, एसटीएफ ने तीन जिलों में दी दबिश; गिरोह खंगाल रही टीम

Mon, 01 Jun 2026 12:34 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: ट्रकों से एंट्री फीस के नाम पर अवैध वसूली में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच में सामने आया कि दो दशक से यह खेल चल रहा था। इसे लेकर एसटीएफ ने तीन जिलों में दबिश दी। 
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एसटीएफ का एक्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वांचल में ओवरलोड और मालवाहक ट्रकों से एंट्री फीस के नाम पर अवैध वसूली में सरगना समेत चार की गिरफ्तारी के बाद जांच में सामने आया कि ये खेल दो दशक से चल रहा था। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की एंटी करप्शन टीम ने गाजीपुर में तैनात एक आरटीओ सिपाही को भी गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने बलिया, मिर्जापुर और सोनभद्र में एक साथ कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी है। 

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जांच के दौरान सामने आया है कि यह नेटवर्क मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर और बलिया से गुजरने वाले ट्रकों से व्यवस्थित तरीके से अवैध वसूली करता था। शुक्रवार रात लखनऊ-सुल्तानपुर रोड पर अहमामऊ-शहीद पथ अंडरपास के पास से चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुए खुलासों ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

ट्रक चालकों और परिवहन कारोबारियों से प्रति ट्रक तीन हजार रुपये तक वसूले जाते थे। इसके बदले उन्हें आरटीओ चेकिंग, ओवरलोडिंग कार्रवाई, वाहनों की लोकेशन संबंधी सूचनाएं और जांच से बचाने का भरोसा दिया जाता था। जांच में पता चला है कि वाहन संख्या, मार्ग और माल की जानकारी पहले से एकत्र कर ली जाती थी। इसके बाद संबंधित ट्रांसपोर्टरों या चालकों से संपर्क कर सेटिंग के नाम पर रकम वसूली जाती थी।
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डिजिटल और मैनुअल दोनों तरीके से होती थी वसूली
एसटीएफ को मिले शुरुआती इनपुट के अनुसार गिरोह नकद के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल करता था। कई बार मध्यस्थों से रकम ली जाती थी ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल लेन-देन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में गिरोह के सरगना विपिन यादव जो 2005 में परिवहन विभाग में आरक्षी पद पर तैनात है। दावा किया है कि वसूली की रकम केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहती थी बल्कि उसका हिस्सा ऊपर तक भी पहुंचता था। 
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