नगर निगम कार्यकारिणी की बैठकें बीते पांच वर्षों में आधी से भी कम हुईं। नियमानुसार हर माह एक बार कार्यकारिणी की बैठक होनी चाहिए। इस हिसाब से पांच साल में 60 बैठक करने का नियम है, लेकिन पांच साल में मात्र 29 कार्यकारिणी की बैठकें हुई हैं। इसी प्रकार दो माह में एक बार सदन की बैठक करने का प्रावधान है और पांच साल में 30 बैठकें होनी चाहिए। पिछले पांच साल में भी 30 बैठकें हुई हैं।
पिछली बार कार्यकारिणी की कम बैठकें हुईं और ज्यादातर हंगामे की भेंट चढ़ गईं। कुछ बैठकें शोक प्रस्ताव में निकल गईं। कार्यकारिणी और सदन की बैठकें समय से नहीं होने पर विपक्षी पार्षदोंं ने सवाल भी उठाए। इन पांच वर्षों में न तो कोई बड़े फैसले लिए गए और न ही कोई उल्लेखनीय कार्य हुए। केवल रूटीन के काम निबटाए गए। नियमानुसार नगर निगम की अधिनियम 88 (2) के तहत विपक्षी दल के पार्षद जब चाहे बैठक की मांग कर सकते हैं। नियम के तहत उनकी संख्या बल कम से कम 25 होनी चाहिए।
सदन भवन के बगैर चली पांच साल तक बैठकें
नगर निगम के जनप्रतिनिधियों के पास अपना सदन भवन भी नहीं है। 2017 से 2022 तक नगर निगम कार्यकाल में बगैर सदन भवन की ही अन्य जगहों पर बैठकें की गईं। कभी टाउनहाल तो कभी सांस्कृतिक संकुल में बैठकें हुईं। सदन भवन की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस कार्यकाल में भवन की ईंट तक नहीं रखी जा सकी है।