कैसे सुलझी हत्या की गुत्थी
तफ्तीश के दौरान लंका इंस्पेक्टर को पता लगा कि नरसिंह साल भर पहले भट्ठे में रहने वाली एक अन्य महिला के पास रहता था और महुआ की शराब बनाने में उसका सहयोग करता था। महिला से नरसिंह की नजदीकी बढ़ी तो उसके पति ने विरोध करना शुरू किया। इस पर नरसिंह महिला से दूरी बनाकर दिव्यांग युवती के करीब आ गया।
इसी बीच शराब बनाने वाली महिला के पास जितेंद्र का आना-जाना शुरू हुआ तो दोनों में करीबी बढ़ गई। तकरीबन चार महीने पहले जुआ खेलने के दौरान नरसिंह और जितेंद्र के बीच मारपीट हुई थी। शराब बनाने वाली महिला और जितेंद्र की नजदीकी बढ़ी तो फिर उसके पति ने विरोध करना शुरू किया। इसी बीच शराब बनाने वाली महिला के पति ने नरसिंह को 10 हजार रुपये में जितेंद्र की हत्या की सुपारी दी।
हत्या से लगभग पांच दिन पहले शराब बनाने वाली महिला के पास नरसिंह फिर आना-जाना शुरू कर दिया था। इस बीच शराब बनाने वाली महिला को जितेंद्र की हत्या की साजिश रचने का पता लगा तो उसको अपने पास से दूर कर दिया। जितेंद्र ने महिला की मां के पास बैठना शुरू कर दिया था। नरसिंह जब तक जितेंद्र की हत्या कर पाता तब तक उसने ही उसे मार दिया।
रात दो बजे के बाद हत्या, 10 मीटर दूर से मारी गोली
जितेंद्र का पिता डकैती का आरोपी था। चंदौली के मुगलसराय में उसकी संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। उसका एक दोस्त बदमाश है और जेल जा चुका है। पुलिस के अनुसार, नरसिंह की हत्या दो फरवरी की रात दो से ढाई बजे के बीच की गई। नरसिंह के सिर पर 10 मीटर की दूरी से गोली मारी गई थी। बीते चार महीने में जितेंद्र का मोबाइल सिर्फ दो फरवरी की रात बंद हुआ और इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
इसके बाद जितेंद्र अगले दो दिन तक अपने घर नहीं गया और दोस्त के पास छुपा रहा। पुलिस ने जब जितेंद्र से पूछताछ की तो सबसे पहले उसका कहना था कि पिस्टल उसके पास नहीं है। पुलिस ने पूछा कि पिस्टल या तमंचा से हत्या की गई है, यह तुम्हें कैसे पता है। इस सवाल पर जितेंद्र फंस गया। वारदात में प्रयुक्त पिस्टल के बारे में उसने बताया कि गंगा में फेंक दिया है।