पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के स्टॉक यार्ड में होली के दिन साजिश के तहत आग लगाई थी। आशंका है कि स्टॉक यार्ड में आग का यह पूरा खेल कॉरिडोर में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए किया गया है। नई सरकार ने अगर जांच कराई तो कई लोग इसमें नपेंगे।
कॉरिडोर के सुरक्षा गॉर्ड विष्णुकांत मिश्रा होली के दिन स्टॉक यार्ड की निगरानी में था। विष्णुकांत ने बताया कि यार्ड से लपटें उठने के बाद जिन लोगों को वह भागते हुए देखा, वह उन्हें जानता तो नहीं है पहले वे अक्सर यहां आते रहे हैं। घटना के बाद से वे नहीं दिख रहे हैं। देखने पर वह उन्हें पहचान लेगा।
इतने अहम तथ्य के सामने आने के बावजूद प्रशासन और पुलिस से लेकर कार्यदायी संस्था तक ने चुप्पी साध ली है। गॉर्ड से पूछताछ तक नहीं की गई है। यार्ड में लगी आग में दो जेसीबी, एक रोजर, एक टैंकर समेत लाखों रुपये के सामान जलकर नष्ट हो गए थे।
काम कराने वाली एजेंसी एपको की ओर से मुकेश कुमार श्रीवास्तव ने कैंट थाने में इसका मुकदमा दर्ज कराया था। अब ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर आगे बढ़ने की उम्मीद कम है।
केंद्र की मोदी सरकार के गंगा निर्मलीकरण अभियान का जवाब देने के लिए वरुणा के प्राकृत स्वरूप से छेड़छाड़ कर शुरू किए गए इस कार्य में धांधली, मनमानी और सरकारी धन के दुरुपयोग की लंबी फेहरिश्त है। 201 करोड़ रुपये के वरुणा कॉरिडोर में डीएम बंगले से लेकर सराय मोहाना तक 10.3 किमी नदी का चैनलाइजेशन किया जाना है।
अब तक इस पर करीब 80 करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है। योजना की भारी-भरकम राशि पर अफसर और नेता नजर ही नहीं गड़ाए रहे, सबने अपना-अपना हिस्सा भी बांट लिया। पर्यटन विकास की इस पेंचीदी योजना पर काम एक बार फिर शुरू हो गया है।