आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा लगने के साथ ही शनिवार की सुबह शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया। रंगोली से सजी वेदियों पर कलशों में आदि शक्ति स्वरूपा का आवाहन कर अखंड दीप जला दिए गए। अपने मनोरथों की पूर्ति के लिए भक्तों ने संकल्प लिए। इसी के साथ आदि शक्ति की 10 दिवसीय उपासना में भक्त लीन हो गए। लोक मंगल के लिए मंदिरों में साधकों ने कहीं दुर्गाशप्तसती तो कहीं रक्षा स्तोत्र का पाठ शुरू कर दिया। राष्ट्र की समृद्धि और शांति के लिए भी अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
सूर्योदय के साथ ही शनिवार को देवी के आवाहन के लिए घट स्थापन शुरू हो गया। घरों में पुरोहितों ने आवाहन, मंत्रोच्चार के साथ षोडशोपचार विधि से मां की पूजा कराई। इसी के साथ व्रत, अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो गया। अभीष्ट फलदायी अभिजीत मुहूर्त 11: 36 से दिन के 12.24 बजे के बीच भी भक्तों ने सर्वार्थसिद्धि के लिए कलश स्थापन किया। उधर, जगत जननी जगदंबा के दरबारों में मध्यरात्रि के बाद से ही भक्तों का तांता लग गया। शीतला घाट स्थित फूलों, लतरों से सजे शीतला माता मंदिर में महिलाओं ने पचरा के साथ ही देवी गीतों के जरिए स्तुति शुरू कर दी। यहां भक्तों का देर रात तक तांता लगा रहा।
आदि बुढ़िया माता की गुफा में महंत शिव प्रसाद पांडेय ने राष्ट्र की समृद्धि और लोक मंगल की कामना से 10 दिन तक मौन साधना आरंभ कर दी। अदलपुरा स्थित शीतला धाम में भी मध्यरात्रि के बाद से जगदंबा के गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में भी भक्तों की लंबी कतार लगी रही। पक्के महाल में मंगला गौरी के अलावा सिद्धिमाता मंदिर में भी भक्तों की भीड़ थी। चुनरी, नारियल, फूल-माला की दुकानें सज गई हैं।