मुंबई से वाराणसी आ रही कामायनी एक्सप्रेस मंगलवार की आधी रात मध्य प्रदेश के हरदा में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस खबर ने ट्रेन सवार पूर्वांचल के 266 यात्रियों के परिवार के सदस्यों के आंखों से नींद उड़ा दी और दिल का सुकून छीन लिया। बुधवार की शाम तक कंट्रोल रूम का फोन घनघनाता रहा और लोग अपने परिवार के सदस्यों का खैर में कैंट रेलवे स्टेशन के चक्कर काटते रहे। हर कोई परेशान, बदहवास और हादसे से आहत था। शाम तक हताहतों की स्थिति स्पष्ट ही नहीं हो सकी। सबको इंतजार था कामायनी के पहुंचने का। जैसे ही ट्रेन पहुंची लोग अपने प्रियजनों से लिपट कर रो पड़े।
मंगलवार की आधी रात कामायनी एक्सप्रेस रात साढ़े 11 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुई तब ज्यादातर लोग नींद में थे। ए-1 में दो यात्री, बी-2 और बी-3 में 19 जबकि स्लीपर बोगियों में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के 245 लोग सवार थे। इनमें 179 यात्री वाराणसी के थे। कई यात्रियों ने अपने घरवालों को फोन कर बताया था कि ‘हां, हम ट्रेन में बैठ गए हैं। कल शाम को पहुंच जाएंगे।’। परिजन भी निश्चिंत होकर उनके आने की राह देख रहे थे। मगर तमाम लोग ऐसे थे, जिनके फोन नहीं लग पाए क्योंकि वहां बारिश हो रही थी और नेटवर्क ध्वस्त था। ऐसे लोग अपने परिवार के सदस्यों का हाल जानने सुबह ही स्टेशन पर पहुंच गए लेकिन वहां से भी सटीक सूचना नहीं मिल पा रही थी। परेशानहाल लोग बार-बार फोन मिलाते और कंट्रोल रूम पर जाकर दरियाफ्त करते रहे। आधी रात जब ट्रेन पहुंची तो हर कोई यात्रियों के भीड़ में अपनों की तलाश करता रहा।