वाराणसी। बीएचयू के धर्मशास्त्र मीमांसा विभाग की ओर से महामहोपाध्याय पं. गजानन शास्त्री मुसलगांवकर की स्मृति में आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. प्रशांत धर्माधिकारी ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में अनुसंधान के गूढ़ तत्व निहित हैं। कहा कि अर्थशास्त्र, मनुस्मृति, महाभारत, गीता आदि अनेक भारतीय ग्रंथों में अनुसंधान के गूढ़ तत्वों का निरूपण किया गया है। प्राचीन अनुसंधान प्रविधि आज के अनुसंधानों के लिए अत्यंत उपादेय है। अध्यक्षता प्रो. राजाराम शुक्ल ने की। इस अवसर पर संस्कृतविद्या-कार्यशाला में शामिल हुए सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। कार्यशाला अध्यापक प्रशांत चतुर्वेदी को भी सम्मानित किया गया। स्वागत प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शंकर कुमार मिश्र ने किया। प्रो. पतंजलि मिश्र, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. रमाकांत, प्रो. बृजभूषण ओझा आदि मौजूद रहे। ब्यूरो