आठ किलोमीटर दूर है डिस्पेंसरी
अस्पताल में फार्मेसी में दवा न मिलने पर दवा के लिए डिस्पेंसरी पर भेजने की व्यवस्था है। लेकिन, डिस्पेंसरी पर भी दवा न के बराबर ही रहती है। मरीजों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज में दवा नहीं मिल रही, तो फिर डिस्पेंसरी पर कैसे मिलेगी। ईएसआईसी से संबद्ध डिस्पेंसरी के एड्रेस भी 8-10 किमी की दूरी पर हैं। उदाहरण के लिए लहुराबीर डिस्पेंसरी आठ किमी दूर अर्दली बाजार में है।
मरीज मोबाइल पर दिखाते हैं एक्सरे रिपोर्ट
अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से सीबीसी जांच भी नहीं हो रही है। वहीं, अल्ट्रासाउंड लंबे समय से नहीं हो रहा है। इसके अलावा एक्सरे की रिपोर्ट प्रिंट नहीं मिल रही है। मरीज मोबाइल पर फोटो क्लिक करके चिकित्सकों को रिपोर्ट दिखाते हैं, जिससे इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इन प्रमुख दवाओं की चल रही कमी
- एसिक्लोफेनेक टैबलेट (सामान्य दर्द की दवा)
- एसिक्लोफेनेक, पैरासिटामॉल व सेरेटियोपेप्टिडेज (दर्द और सूजन की दवा)
- रेबेप्राजोल कैप्सूल (सामान्य पेट संबंधी रोगों में काम आने वाली दवा)
- क्लोबेटासॉल ऑइंटमेंट (इंफेक्शन की दवा)
- थाइरॉक्सिन टैबलेट (थाइरॉइड की दवा)
- कैलामाइन, जिंक ऑक्साइड लोशन (स्किन की दवा)
- मेटफॉर्मिन 500/1000 एमजी टैबलेट (शुगर की दवा)
- ओम्निपाक 300 एमजी इंजेक्शन (रेडियोथेरेपी के दौरान प्रयोग होने वाली दवा)
क्या बोले अधिकारी
दवाओं की कमी को 15 दिनों में ठीक कर दिया जाएगा। दवाओं को लेकर बजट की किसी प्रकार की कमी नहीं है। अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति का प्रयास किया जा रहा है। ब्लड टेस्ट की मशीन खराब है, उसके लिए टेक्निशियन बुलाया गया है। अगले सप्ताह तक ब्लड टेस्ट शुरू हो जाएगा। एक्सरे के लिए क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था शुरू कराई जाएगी। इससे डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर सीधे मरीज की रिपोर्ट पहुंच सकेगी। फार्मेसी का सर्वर भी ठीक कराया जाएगा। -डॉ. दीनानाथ, एमएस, ईएसआईसी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज