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अंग्रेजी साहित्य के शिक्षक प्रो. चंद्रबली ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया : डॉ. महेंद्र

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अर्दली बाजार स्थित जिला पुस्तकालय में साहित्यिक संघ और विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वावधान मे
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वाराणसी। साहित्यिक संघ और विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वावधान में बृहस्पतिवार को अर्दली बाजार स्थित जिला पुस्तकालय में हिंदी की धरोहर : काशी की सृजन परंपरा व्याख्यानमाला की 19वीं कड़ी आयोजित की गई। इसमें डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने मार्क्सवादी चिंतक एवं साहित्यकार प्रो. चंद्रबली सिंह के साहित्यिक योगदान पर चर्चा की। कहा कि अंग्रेजी साहित्य के शिक्षक रहे प्रो. चंद्रबली सिंह ने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उन्होंने आलोचना और काव्यानुवाद को अपनी रचनाधर्मिता का प्रमुख क्षेत्र बनाया। विदेशी भाषाओं के विश्वप्रसिद्ध कवियों की कविताओं के लयात्मक काव्यानुवाद से उन्हें पहचान मिली।
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डॉ. उमेश प्रसाद सिंह ने ठाकुर प्रसाद सिंह के व्यक्तित्व पर बात की। कहा कि ठाकुर प्रसाद केवल रचनाकार ही नहीं, बल्कि स्वयं एक रचना और अद्भुत काव्य भी थे। उनकी रचनाओं में जीवन के अनुभव, संवेदनाएं और आत्मसंघर्ष विशेष रूप से दिखाई देते हैं। अध्यक्षता कर रहे डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ठाकुर प्रसाद सिंह गीतकार, कथाकार और निबंधकार के रूप में विशिष्ट थे, जबकि प्रो. चंद्रबली सिंह मार्क्सवादी समीक्षक और विश्वप्रसिद्ध कविताओं के अनुवादक के रूप में जाने जाते हैं। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त हो रहे पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार का अभिनंदन किया गया। स्वागत दयानिधि मिश्र ने किया। हिमांशु उपाध्याय ने काव्यपाठ किया। राज नारायण सिंह ने ठाकुर प्रसाद सिंह से संबंधित कुछ रोचक संस्मरण सुनाए। संचालन डॉ. रचना शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र नाथ मिश्र ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, प्रकाश उदय, शिवकुमार पराग, प्रो. श्रद्धानंद, राज नारायण सिंह, गिरिजेश तिवारी, डाॅ. इंदीवर, गिरीश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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