बनारस में गंगा की सहायक नदियां वरुणा और असि के पुनरुद्धार की आस फिर से जगी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल कर दी। 232 पन्नों की रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने यह स्वीकार किया है कि दोनों नदियां अतिक्रमण और प्रदूषण की जद में हैं। जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बात कही है। एनजीटी अब 24 अगस्त को इस पर सुनवाई करेगा। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि वाराणसी जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में असि नदी के अतिक्रमण को हटाने का सुझाव दिया है। जिला प्रशासन ने वरुणा के उद्गम स्थल मैलहन ताल पर किसानों द्वारा अतिक्रमण की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों ने फूलपुर स्थित मैलहन ताल की सौ एकड़ भूमि पर खेती करना शुरू कर दिया है। वरुणा नदी का उद्गम चार से पांच किलोमीटर आगे वरुणेश्वर महादेव मंदिर के पास शिफ्ट हो गया है। वहां से आगे बढ़ने पर वरुणा में अतिक्रमण तो कम है, लेकिन नदी में प्रदूषण का स्तर ज्यादा है। वहीं रिपोर्ट में वरुणा के एसटीपी के मॉडल में बदलाव करने की बात कही गई है। असि नदी के उद्गम स्थली से भी अतिक्रमण हटाने की बात कही गई है। असि की उद्गम स्थली कर्दमेश्वर कुंड और कंचनपुर पोखरे को जोड़ने का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि असि पर अतिक्रमण की संख्या बहुत ज्यादा है। बहुत से लोगों ने नदी के नाम पर अपना चढ़वा लिया है। जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम ने कहा है कि असि पर अतिक्रमण के कारण ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। बिना खोदाई और अतिक्रमण हटाए असि नदी का पुनरुद्धार नहीं हो सकता है। बता दें कि एनजीटी ने असि वरुणा पर चार अगस्त के पहले एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन निर्धारित समय तक रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण पांच अगस्त को होने वाली सुनवाई को टाल दिया गया था।