लोहता। भरत के नाम पर पड़ा भरथरा गांव के पंचायत चुनाव में इस बार मुख्य मुद्दा सड़कों का रहेगा। शहर से सटी ग्राम सभा में इस बार 10 से अधिक प्रत्याशी भाग्य अजमा सकते हैं। काशी विद्यापीठ विकास खंड का भरथरा गांव जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर की दूरी पर बसा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गांव में भरतेश्वर महादेव का मंदिर है, जिसकी स्थापना भगवान राम के अनुज भरत ने किया था। उसी वजह से गांव का नाम भरथरा पड़ा। पिछले पंचायत चुनाव में सड़क, बिजली, तालाब की मरम्मत का मुद्दा रहा। इस बार गांव की बदहाल सड़कें मुख्य मुद्दा बनेंगी। पिछले चुनाव में दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इस बार प्रत्याशियों की संख्या बढ़ सकती हैं। दावेदार अभी से अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। 25 हजार की आबादी वाले इस गांव सभा में 4200 मतदाता हैं। गांव में ब्राह्मण, मौर्या, पटेल, यादव है। एक राजस्व गांव बेदौली भी जुड़ा है। वरुणा नदी और लोहता स्टेशन के बीच में बसे इस गांव में शहर जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। गांव में पेयजल की टंकी, प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के साथ ही आंगनबाड़ी और सीवर लाइन, बिजली की बहुत अच्छी सुविधा है। शहर भी अब धीरे-धीरे भरथरा गांव की तरफ बढ़ रहा है।
केंद्र और राज्य सरकार गांव के विकास कार्य के लिए बहुत पैसा दे रही है। लेकिन सही काम गांव में नहीं हो रहा है। जरूरतमंदों को राशन और आवास नहीं मिल पा रहा है। गांव की सड़क की हालत खस्ताहाल है। -राजेश मौर्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य
गांव में विकास कार्य जिस तरह से होना चाहिए, वैसा नहीं हुआ है। पंचायत भवन टूटा-फूटा है। पंचायत भवन का रंग-रोगन नहीं हुआ है। कई जगह खड़ंजा और सड़कें खराब हो गई हैं, जिसकी मरम्मत नहीं हुई है। -कौशल मिश्रा, ग्रामीण
गांव सभा में कई महिला समूह का गठन हुआ है। इसमें महिलाएं जुड़कर समूह के माध्यम से अपना व्यवसाय करती हैं। स्वयं में आत्मनिर्भर हैं। पंचायत चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी। -रीना यादव, ग्राम पंचायत सदस्य
पांच साल में तालाब का सौंदर्यीकरण, सीवर लाइन, खड़ंजा का निर्माण कराया गया है। सभी घरों में शौचालय और पात्रों को राशन कार्ड और आवास दिया गया है। गांव के चार खड़ंजा की सड़क को सीसी रोड बनवाने का प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन को भेजा गया है। बजट पास होते ही वह भी बन जाएगा। -नागेंद्र यादव उर्फ चिंटू, ग्राम प्रधान भरथरा