राजातालाब। आराजी लाइन विकासखंड की रानीबाजार ग्राम पंचायत के प्रधान श्यामजी जायसवाल के पास 20 साल प्रधानी का तजुर्बा है। 1990 से लेकर 2020 तक के पंचायत चुनाव में 20 साल तक प्रधानी उनके परिवार में ही रही। तीन बार स्वयं और एक बार पत्नी प्रधानी रहीं। बीच में 10 साल की प्रधानी दूसरे लोगों के पास थी।
गांव की आबादी लगभग 1900 है और 1100 मतदाता हैं। पिछला चुनाव गांव में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया। इनमें से एक था पोखरे का निर्माण, हालांकि यह काम अभी अधूरा है। प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल भी नहीं है। अब विपक्षी इन्हीं मुद्दों को उठा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे इस गांव में लोगों के पास खेती के लिए जमीन नहीं है। सभी लोग व्यवसाय या नौकरी करते हैं। दो सड़कों के बीच बसे इस गांव में अतिक्रमण बड़ी समस्या है। राजातालाब रेलवे क्रॉसिंग से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक लगने वाले जाम से लोग परेशान रहते हैं। प्रधान का दावा है कि गांव में सभी सड़कें बन गई हैं। महाराज बलवंत सिंह महाविद्यालय के सामने पंचायत भवन भी बनवाया गया है। सभी नाले अंडर ग्राउंड हो गए हैं।
दो गांवों का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। पहले मैं रानी बाजार और बाद में कचनार का ग्राम प्रधान बना। जब 1000 से कम आबादी थी तो रानी बाजार को कचनार में मिला दिया गया था, तब भी हमें और पत्नी को प्रतिनिधित्व का मौका मिला था। अब 1000 से अधिक मतदाता होने पर फिर से ग्राम पंचायत रानी बाजार का गठन हुआ है। इसके पहले जिला पंचायत सदस्य और राजातालाब शीतगृह के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। चुनाव में किए गए सारे वादे पूरे हो चुके हैं। -श्यामजी जायसवाल, ग्राम प्रधान
चुनाव में महज 28 वोट से द्वितीय स्थान पर रहा। प्रधानी के लिए लोग छल कपट और अनैतिक आचरण करके मत प्राप्त कर लेते हैं। झूठा वादा करते हैं, जिसे बाद में पूरा नहीं कर पाते। रानी बाजार में भी सारे काम पेंडिंग हैं। लोगों को पीने के लिए पानी तक नहीं मिल पाता है। -गुलाब जायसवाल, चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे
बाजार की स्थिति अत्यंत खराब है। पानी निकासी की समस्या है। कई सड़कों पर पानी भर जाता है। लोगों के घरों में पानी चला जाता है। रानी बाजार में न तो प्राथमिक विद्यालय है और न ही जूनियर हाईस्कूल, जिससे छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मिल सके। जाम से दुकानदार परेशान रहते हैं। -शिवम पांडे, ग्रामीण
गांव के पोखरी पर अवैध कब्जा है, जिसे हटवाने में प्रधान रुचि नहीं लेते हैं। छोटा सा गांव होने के बावजूद पूरी तरह विकास कर पाने में ग्राम प्रधान असमर्थ है। चुनाव से पहले कई वादे किए थे, जो पूरे नहीं हुए। गांव में सौ इज्जत घर भी नहीं बन पाए। -राजा हाशमी, ग्रामीण