अस्सी घाट पर शनिवार की शाम ‘खेलें मशाने में होरी दिगंबर’ के बोल पर पं. छन्नूलाल मिश्र ने होरी को सुर दिया तो लोग झूमने लगे। होरी, ठुमरी की बंदिशों पर रागों की खुशबू महकी तो पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी पर स्वरों के बेजोड़ समन्वय ने संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा।
इसी के बनारस के विख्यात तबला वादक पं. अनोखे लाल मिश्र की याद में आयोजित दो दिनी संगीत संध्या का आगाज हो गया। यह संगीत प्रस्तुति बनियान ट्री इवेंट्स की ओर से आयोजित की गई। संगीत निशा की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। सबसे पहले पं. रोनू मजूमदार ने राग झिंझोटी की अवतारणा की।
अलाप, जोड़, झाला के बाद उन्होंने रूपक तीन ताल में निबद्ध दो बंदिशें बजाईं। इस दौरान स्वरों के समन्वय और आध्यात्मिक छाप ने लोगों को भाव विभोर कर दिया। अंत में समय न होने के बावजूद रोनू ने एक भजन अपनी ओर से पेश किया- पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...। उनके साथ इस दौरान तबले पर संगत की पं. किशोर मिश्र ने।