रमेश ने बताया कि एक घाट पर सात-आठ पंपिंग सेट लगाकर हर समय सफाई कराई जाए तो एक सप्ताह के करीब लग जाता है। इस बार देरी से भी सफाई शुरू की गई और पंपिंग सेट भी कम लगे है। यदि ऐसे ही सफाई होती रही तो छठ पूजा तक सभी घाटों की सफाई नहीं हो पाएगी।
बुधवार को चल रहे थे सिर्फ 17 पंप: बुधवार को नगर निगम की टीम प्रमुखता से सिर्फ तीन घाट पर ही सफाई कर रही थी। बाकी जगहों पर पंप बंद पड़े थे। इसमें सुबह ए बनारस के नीचे घाट पर 11, अस्सी घाट पर 3 और गंगा महल घाट पर दो पंप से सफाई हो रही थी। सफाई कार्य में जुटे एक कर्मी ने बताया कि कुछ पंप खराब हो गए हैं। इसलिए उनसे काम नहीं हो पा रहा है।
मिट्टी की मोटी परत के बीच ऐसे तय होता है सफर।
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नगर निगम के लक्ष्य में इस समय दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट, राजेंद्र प्रसाद, मर्णिकर्णिका, सिंधिया घाट, राजघाट ही शामिल हैं। यही सबसे अधिक सफाई का काम हो रहा है। वहीं केंद्रीय देव दीपावली समिति के अध्यक्ष वागीश शास्त्री का कहना है कि सभी 84 घाटों पर छठ की पूजा होती है। सभी जगहों पर भक्त पहुंचते हैं। कोई चुनिंदा घाट नहीं है, छठ पूजा तक तो सभी घाटों पर सफाई होनी चाहिए।
बोले अधिकारी
जिन घाटों पर छठ पूजा के लिए लोग जुटते हैं। वहां वह छह नवंबर से पहले पूरी तरह सफाई करा ली जाएगी। बाकी सभी घाटों पर सफाई का काम देव दीपावली से पहले पूरा कर लिया जाएगा। कोई पंप खराब नहीं है। सभी 34 पंप काम कर रहे हैं। - मोइनुद्दीन, मुख्य अभियंता, नगर निगम