वाराणसी। हिंदू पंचांग में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। इस मास में लगातार 11 दिनों के दौरान कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। दिवाली पर घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होगी तो धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की आराधना की जाएगी। गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होगी, जबकि सूर्यदेव को समर्पित छठ महापर्व के दौरान काशी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। पर्वों का सिलसिला छह नवंबर को धनतेरस से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चार दिवसीय छठ महापर्व समेत कई पर्व मनाए जाएंगे।
कार्तिक मास को सनातन परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। इस महीने में करीब 20 व्रत और त्योहार पड़ते हैं। हालांकि, छह नवंबर को धनतेरस से लगातार प्रमुख पर्वों का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो 16 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद भी पूरे महीने धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि कार्तिक मास की विशेष महिमा है। भगवान विष्णु को समर्पित इस मास में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्ण और धन के देवता कुबेर की भी आराधना की जाती है। इस दौरान मृत्युलोक के देवता यमराज की पूजा का भी विशेष महत्व है। काशी में संकठा घाट पर यमराज का मंदिर भी है। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक भैया दूज भी इसी अवधि में मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 13 नवंबर से सूर्यदेव की आराधना का महापर्व छठ शुरू होगा। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होगी। 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को और 16 नवंबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
धनतेरस से शुरू होकर सूर्य षष्ठी तक पूजा
छह नवंबर को धनतेरस के साथ पर्वों की शुरुआत होगी। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की आराधना की जाएगी। सात नवंबर को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली मनाई जाएगी। इसी दिन हनुमान जी का प्राकट्योत्सव भी मनाया जाएगा। आठ नवंबर को दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होगी।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा, जबकि 11 नवंबर को भैया दूज यानी यम द्वितीया होगी। छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय पर्व का समापन होगा।
इसके बाद भी कार्तिक मास के प्रमुख पर्व जारी रहेंगे। 17 नवंबर को गोपाष्टमी, 18 नवंबर को अक्षय नवमी और 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी तथा तुलसी विवाह मनाया जाएगा। 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का पर्व होगा।