फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi: बरेका मैदान में लगाया गया रावण का पुतला, इको फ्रेंडली दशानन के पुतले की लंबाई 75 फीट

Fri, 11 Oct 2024 02:53 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

बरेका मैदान में इस बार दशानन का आकर्षण दिखने लगा है। मैदान में पुतले का लगा दिया गया है। रावण के पुतले की लंबाई 75 फीट है इसके साथ ही कुंभकर्ण 65 फीट और मेघनाद का 55 फीट का पुतला बनाया गया है। इस बार इन पुतलों की खासियत सिर्फ इनका आकार ही नहीं है बल्कि इन्हें इकोफ्रेंडली बनाया गया है।
विज्ञापन
बरेका मैदान में लगा दशानन का पुतला - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी के बरेका मैदान में इस बार 75 फीट का रावण, 65 फीट का कुंभकर्ण और 55 फीट के मेघनाद का पुतला मैदान में लग गया है। पुतले के लगने के साथ ही दशहरा पर्व को मनाने का उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है । कल पुतले को बनाने में लगे 45 दिनों की तपस्या की सफलता के बाद बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक पर्व को मनाया जाएगा।

विज्ञापन


आपको बता दें कि बरेका में तैयार होने वाला रावण का पुतला साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है। एक मुस्लिम परिवार तीन पुश्तों से रावण के पुतले को तैयार करता है । पुतले को तैयार करने वाले शमसाद खां की माने तो पहले उनके नाना बरेका के पुतले को बनाते थे उसके बाद इनके पिता भी पुतले बनाते थे और अब ये अपने सात साथियों के साथ परिवार को साथ लेकर पुतले  बनाते हैं।

विज्ञापन



बताते चलें कि पुतले को बनाने में पूरी शुद्धता का ध्यान रखते हैं इतना ही नहीं पहले पुतले को लकड़ी और पेपर से आकार दिया जाता है। उसके बाद आकृति उकेरकर उसमें रंग भरे जाते हैं और इस पूरी प्रक्रिया में 45 दिनों का समय लगता है इन दिनों में जैसे जैसे पुतला तैयार होता है इनका काम लगातार बढ़ जाता है पुतला बनाने के साथ समय निकालकर इबादत कर लेते हैं। जब इनसे ये सवाल पूछा गया कि आप हिंदू धर्म का पुतला लगा रहे हैं तो इन्होंने कहा कि ये बातें सियासतदानों की हैं जमीन पर हमारी तहजीब भाईचारे की है।
विज्ञापन


इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले को इको फ्रेंडली बनाया गया है और बरेका के पुतले प्रकृति रक्षा का संदेश दे रहे हैं। पुतले में रंग भरने के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है इसके साथ ही जब रावण जले तो पर्यावरण को नुकसान न हो इसके लिए पटाखे भी इकोफ्रेंडली प्रयोग किए गए हैं। 

रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले मैदान तक पहुंच गए हैं। सुरक्षा इंतेजामों के बीच कल दशहरा मनाया जाएगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें